गाजीपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक को अवमानना का दोषी ठहराया गया
गाजीपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक को अवमानना का दोषी ठहराया गया
प्रयागराज, 26 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक कर्मचारी के वेतन का भुगतान करने के निर्देश वाले चार साल पुराने अंतरिम आदेश का अनुपालन करने में विफल रहने पर गाजीपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक प्रकाश सिंह को अवमानना का दोषी करार दिया है।
न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने कानून के शासन और न्यायपालिका की गरिमा का सशक्त बचाव करते हुए सोमवार को कहा, ‘‘न्यायाधीशों से सुपर रोबोट जैसा काम करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती, जबकि वादकारी खुलेआम न्यायिक आदेशों को वैकल्पिक ‘सजावटी टुकड़ों’ की तरह मानते हैं।’’
इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, राधेश्याम यादव नाम के एक व्यक्ति ने 2017 में एक रिट याचिका दायर की थी जिसको लेकर 18 अप्रैल, 2022 को अदालत ने प्रतिवादियों को याचिका लंबित रहने के दौरान राधेश्याम का वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया था।
न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने उच्च न्यायालय पर मुकदमों के बोझ की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘ हमारे इलाहाबाद उच्च न्यायालय जैसी संवैधानिक अदालतों में जहां प्रतिदिन हर न्यायाधीश के समक्ष 400 से लेकर 800 मामले सूचीबद्ध होते हैं, इन्हें निस्तारित करने में कभी वर्षों और कभी दशकों का समय लग जाता है।’’
अदालत ने कहा, “इसके बावजूद, लोग ऐसे बोझ तले दबे न्यायाधीशों से सुपर रोबोट या सुपर कंप्यूटर या महामानव जैसा काम करने की उम्मीद करते हैं। यदि लंबित अवधि के दौरान पक्षों को निर्देशों की अवहेलना करने की अनुमति दी जाती है तो न्याय प्रशासन अराजकता और अव्यवस्था में डूब जाएगा। कानून ऐसी धृष्टता को बर्दाश्त नहीं करता है।”
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायपालिका की गरिमा पूरी तरह से जनता के विश्वास और इसके आदेशों के सख्ती से अनुपालन पर निर्भर है।
भाषा सं राजेंद्र शोभना
शोभना

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