हिमनद घट रहे हैं, संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों में संतुलित विकास की आवश्यकता: भूपेंद्र यादव
हिमनद घट रहे हैं, संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों में संतुलित विकास की आवश्यकता: भूपेंद्र यादव
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि हिमालय जैसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों में विकास परियोजनाएं संतुलित होनी चाहिए और उन्होंने घटते हिमनद पर चिंता व्यक्त की।
मंत्री ने प्राकृतिक संसाधनों के रणनीतिक महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि आज की भू-राजनीति काफी हद तक प्राकृतिक संसाधनों और उनके उपयोग पर टिकी हुई है।
परिवर्तन, अनुकूलन और लचीलेपन के निर्माण के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अनुसंधान एवं अनुप्रयोग के राष्ट्रीय संस्थान (निरंतर) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यादव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों का विशाल भंडार है और इन संसाधनों के संतुलित, उपयुक्त और समझदारीपूर्ण उपयोग की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी ताकत हमारे प्राकृतिक संसाधनों, विशेष रूप से जैव संसाधनों में निहित है। हालांकि भारत ने विनिर्माण, डेटा, सॉफ्टवेयर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में प्रगति की है, लेकिन जीवन के चार मूलभूत तत्व – भोजन, दवा, ऊर्जा और तेल – अंततः प्रकृति से ही प्राप्त होते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘देश को पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के लिए संतुलित नीति बनानी होगी।’’
जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का जिक्र करते हुए यादव ने कहा, ‘‘ग्लेशियर घट रहे हैं, और हिमालय जैसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों में विकास संतुलित होना चाहिए। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पारिस्थितिकी संस्थान और राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन संस्थान जैसे संस्थान सहयोग और समन्वय के माध्यम से इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।’’
‘निरंतर’ पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले संस्थानों का एक मंच है जिसका उद्देश्य संरक्षण प्रयासों में समन्वय को बेहतर बनाना है।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश

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