गोवा नाइटक्लब अग्निकांड : आरोपियों की जमानत रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज

गोवा नाइटक्लब अग्निकांड : आरोपियों की जमानत रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज

गोवा नाइटक्लब अग्निकांड : आरोपियों की जमानत रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज
Modified Date: August 31, 2026 / 12:37 pm IST
Published Date: August 31, 2026 12:37 pm IST

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2025 के गोवा नाइटक्लब अग्निकांड के मामले में तीन आरोपियों को दी गई जमानत रद्द करने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सोमवार को खारिज कर दिया। इस अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हुई थी।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने नाइटक्लब के मालिकों सौरव लूथरा और गौरव लूथरा तथा उनके कारोबारी साझेदार अजय गुप्ता को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

शीर्ष न्यायालय ने निचली अदालत को भी मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का निर्देश दिया।

छह दिसंबर, 2025 को अरपोरा स्थित ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में भीषण आग लग गई थी। इस हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 50 अन्य लोग घायल हुए थे।

बंबई उच्च न्यायालय ने 18 अगस्त को तीनों की जमानत रद्द कर दी थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि निचली अदालत ने जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री पर उचित तरीके से विचार नहीं किया और यह मानकर गलती की कि आरोपियों का अपराध हत्या या डकैती जैसे जघन्य अपराध जितना गंभीर नहीं था।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से संकेत मिलता है कि रेस्तरां जरूरी लाइसेंस के बिना चलाया जा रहा था और उसका ढांचा भी अनधिकृत था। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों और उनके साझेदारों को कथित तौर पर इस बात की जानकारी थी कि पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के बिना परिसर के अंदर आग के साथ करतब दिखाना जोखिम भरा था।

लूथरा बंधु और अजय गुप्ता ‘एम/एस बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी अरपोरा एलएलपी’ में साझेदार थे, जो इस नाइटक्लब का संचालन करती थी। निचली अदालत ने इस साल अप्रैल में तीनों को जमानत दे दी थी।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। गोवा सरकार ने आरोपियों को जमानत देने वाले सत्र अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा


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