विदेश में अच्छी बातें, देश में चुप्पी: सिब्बल ने भागवत पर साधा निशाना

विदेश में अच्छी बातें, देश में चुप्पी: सिब्बल ने भागवत पर साधा निशाना

विदेश में अच्छी बातें, देश में चुप्पी: सिब्बल ने भागवत पर साधा निशाना
Modified Date: August 30, 2026 / 10:23 am IST
Published Date: August 30, 2026 10:23 am IST

नयी दिल्ली, 30 अगस्त (भाषा) राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए ‘‘विविधता में एकता भारत के डीएनए में है’’ संबंधी बयान को लेकर रविवार को उन पर निशाना साधा और कहा कि केवल शब्दों से काम नहीं चलता, काम में यह नजर आना चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ता और निर्दलीय राज्यसभा सदस्य सिब्बल ने भागवत पर तंज करते हुए कहा कि यह ‘विदेश में अच्छी बातें’ और ‘घर में चुप्पी’ जैसा मामला है।

सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ न्यूयॉर्क में भागवत: ‘विविधता हमारी स्वाभाविक एकता का आभूषण है। इसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए’। विदेश में अच्छी बातें, घर में चुप्पी। शब्द मायने नहीं रखते, काम में नजर आना चाहिए।’’

सिब्बल की यह टिप्पणी आरएसएस प्रमुख भागवत के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और इसका उत्सव मनाया जाना चाहिए, सम्मानित किया जाना और स्वीकार किया जाना चाहिए।

शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से अधिक सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ‘‘जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है : विविधता में एकता।’’ उनकी इस बात पर वहां उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं।

उन्होंने यह बात ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ फोरम द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में कही।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं।’’ उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है।

करीब एक घंटे के अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘‘विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही हमें एकता की इस भावना को भी ध्यान में रखना चाहिए। यह बहुत सच्ची भावना है।’’

भाषा शोभना वैभव

वैभव


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