सरकारी अधिकारी अश्वनी कुमार ने कम उम्र से लैंगिक संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर दिया
सरकारी अधिकारी अश्वनी कुमार ने कम उम्र से लैंगिक संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर दिया
नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) सरकारी अधिकारी अश्वनी कुमार ने शनिवार को कहा कि महिलाओं की सुरक्षा की शुरुआत समाज द्वारा बच्चों की सोच और दृष्टिकोण को आकार देने के तरीके से होनी चाहिए।
कुमार ने कहा कि स्कूल कम उम्र से ही लड़कों में सम्मान, गरिमा, समानता और सहमति जैसे मूल्यों की समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कुमार यहां मॉडर्न स्कूल, बाराखंभा रोड में बतौर अभिनेता अपनी पहली फिल्म ‘देवयानी’ के विशेष प्रदर्शन के बाद छात्रों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तीकरण और पिता-पुत्री के रिश्ते को लेकर चर्चा हुई।
असम सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव तथा सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार निदेशालय (डीआईटीईसी) में निदेशक के पद पर कार्यरत आईएएस अधिकारी कुमार ने कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून, पुलिस व्यवस्था और संस्थान जरूरी हैं, लेकिन स्थायी बदलाव के लिए समाज को सोच और व्यवहार की जड़ों पर काम करना होगा।
कुमार ने कहा, ‘‘महिलाओं की सुरक्षा उस समय से बहुत पहले शुरू हो जाती है, जब कोई मामला पुलिस या न्याय व्यवस्था तक पहुंचता है। इसकी शुरुआत उन मूल्यों से होती है, जो हम अपने बच्चों को घर और स्कूल में सिखाते हैं। जब लड़के स्कूल के शुरुआती वर्षों से यह सीखते हैं कि महिलाओं का सम्मान करना एक बुनियादी मानवीय मूल्य है, तो हम ऐसी पीढ़ी तैयार करते हैं जो अधिक संवेदनशील, जिम्मेदार और सम्मानजनक हो।’’
युवा पीढ़ी का जिक्र करते हुए कुमार ने कहा कि ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा’ ऐसी दुनिया में बड़े हो रहे हैं, जहां उन्हें पिछली पीढ़ियों की तुलना में बहुत कम उम्र में विचारों और सूचनाओं तक पहुंच मिल रही है और वे पारंपरिक धारणाओं पर सवाल उठाने के लिए भी अधिक तैयार हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह पीढ़ी हर उस बात को सहजता से स्वीकार नहीं करती, जो उसे विरासत में मिलती है। युवा सवाल पूछते हैं, रूढ़ियों को चुनौती देते हैं और अपने विचार बनाते हैं। इससे स्कूल और परिवारों को समानता, गरिमा, सहानुभूति और सम्मान जैसे मुद्दों पर उनसे कम उम्र में संवाद करने का महत्वपूर्ण अवसर मिलता है।’’
कुमार ने कहा कि उद्देश्य केवल लड़कियों को अपनी सुरक्षा के उपाय सिखाना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माहौल तैयार करना भी होना चाहिए, जिसमें लड़के बड़े होते हुए एक सुरक्षित समाज के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी को समझें।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप

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