सरकार ने आयातित दवाओं के लिए एक वर्ष की न्यूनतम शेष शेल्फ लाइफ का प्रस्ताव रखा

सरकार ने आयातित दवाओं के लिए एक वर्ष की न्यूनतम शेष शेल्फ लाइफ का प्रस्ताव रखा

सरकार ने आयातित दवाओं के लिए एक वर्ष की न्यूनतम शेष शेल्फ लाइफ का प्रस्ताव रखा
Modified Date: June 26, 2026 / 12:46 pm IST
Published Date: June 26, 2026 12:46 pm IST

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा नियमों में संशोधन संबंधी मसौदा अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत आयातित दवाओं के लिए आयात के समय कम से कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है।

इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को पर्याप्त उपयोग योग्य अवधि वाली दवाएं मिलें।

जून 22 को राजपत्र में सार्वजनिक परामर्श के लिए प्रकाशित मसौदा संशोधन में मौजूदा प्रावधान को बदलने का प्रस्ताव है, जिसके अनुसार आयातित दवाओं के लिए वर्तमान में 60 प्रतिशत से अधिक शेष शेल्फ लाइफ की अनिवार्यता को संशोधित कर आयात के समय कम से कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ कर दिया जाएगा।

हालांकि, जैविक उत्पादों और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स की विशेष प्रकृति और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए उनके लिए वर्तमान नियम यानी 60 प्रतिशत से अधिक शेष शेल्फ लाइफ की शर्त जारी रहेगी।

मंत्रालय ने कहा कि यह प्रस्ताव दवा आपूर्ति श्रृंखला में अधिक दक्षता लाने और मरीजों के लिए गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, आयात के समय दवाओं के पास कम से कम 12 महीने की शेष अवधि होने से उनका वितरण और उपयोग के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव केवल आयात के समय लागू शेल्फ लाइफ की शर्त से संबंधित है।

यह दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा या प्रभावशीलता से जुड़े अन्य नियमों में कोई बदलाव नहीं करता, जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम 1940 और औषधि नियम, 1945 के तहत लागू हैं।

मंत्रालय ने सभी हितधारकों से इस मसौदा अधिसूचना पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं।

भाषा शोभना रंजन

रंजन


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