महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, संसद में टकराव के आसार

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महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, संसद में टकराव के आसार

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  • Publish Date - April 15, 2026 / 12:32 AM IST,
    Updated On - April 15, 2026 / 12:32 AM IST

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर इस सप्ताह होने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले मंगलवार को सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया।

कांग्रेस ने इस कदम की मंशा पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने उस पर अतीत में महिलाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

देश की महिलाओं के नाम लिखे पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यदि 2029 में लोकसभा और विभिन्न विधानसभा चुनाव पूरी तरह महिला आरक्षण लागू होने के साथ कराए जाते हैं, तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत एवं जीवंत बनेगा।

उन्होंने कहा कि जब महिलाएं नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएंगी, तो ‘विकसित भारत’ की यात्रा को और मजबूती मिलेगी।

इस बीच, दक्षिण भारत के दो प्रमुख गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों- तमिलनाडु के एम.के. स्टालिन और तेलंगाना के ए. रेवंत रेड्डी ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र पर हमला तेज कर दिया।

स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि तमिलनाडु के साथ कोई अन्याय हुआ तो “व्यापक आंदोलन” होगा, जबकि रेड्डी ने इसे “अन्याय” बताया।

रेड्डी ने प्रधानमंत्री को खुले पत्र में सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की और कहा कि केवल जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों में वृद्धि करने से देश के संघीय संतुलन पर असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों के लिए यह ‘अनुपात आधारित मॉडल’ स्वीकार्य नहीं होगा और बिना उनकी चिंताओं को दूर किए आगे बढ़ने पर व्यापक विरोध होगा।

उन्होंने आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन से मिलकर सामूहिक रणनीति बनाने की भी अपील की।

वीडियो संदेश में स्टालिन ने कहा कि यदि परिसीमन के जरिये उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत असंतुलित तरीके से बढ़ाई गई, तो तमिलनाडु में जोरदार विरोध प्रदर्शन होंगे।

महिला आरक्षण कानून को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने के लिए परिसीमन करके लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है।

संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे के अनुसार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगी।

सरकार द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक सांसदों के बीच साझा किए जाने के बाद कांग्रेस ने कहा कि यदि किसी विधेयक की मंशा ‘भ्रामक’ हो, तो उससे संसदीय लोकतंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “जब किसी विधेयक की नीयत और उसकी सामग्री दोनों संदिग्ध हों, तो लोकतंत्र को भारी नुकसान होता है।”

वहीं, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने प्रधानमंत्री के इस कदम को “ऐतिहासिक” बताते हुए समर्थन दिया।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह पहल महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और भारतीय लोकतंत्र में “स्वर्णिम अध्याय” जोड़ेगी।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी सभी दलों और सांसदों से महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन का समर्थन करने की अपील की।

केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

उन्होंने कहा कि 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र आहूत किया जाएगा, जिसमें इस कानून को जल्द लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने महिलाओं को नजरअंदाज किया।

सोलह से 18 अप्रैल तक संसद का तीन-दिवसीय विशेष सत्र आहूत किया है, जिसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन लाकर 2029 से इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ किया जाएगा।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश