ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा नहीं बने सरकार: वाम दल

ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा नहीं बने सरकार: वाम दल

ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा नहीं बने सरकार: वाम दल
Modified Date: January 21, 2026 / 04:47 pm IST
Published Date: January 21, 2026 4:47 pm IST

नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) वाम दलों ने बुधवार को सरकार से आग्रह किया कि वह ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के अमेरिकी निमंत्रण को स्वीकार नहीं करे क्योंकि यह फलस्तीन से जुड़े मकसद के साथ ‘बड़ा विश्वासघात’ होगा।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह आरोप भी लगाया कि बोर्ड के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र को दरकिनार करने का प्रयास किया गया है और अमेरिका द्वारा नियंत्रित एक नया अंतरराष्ट्रीय ढांचा बनाने की कोशिश की जा रही है।

बयान में कहा गया, ‘हम, वामपंथी दल, भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि वह तथाकथित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर अमेरिका द्वारा प्रस्तावित स्थिति को स्वीकार न करें, जिसका उद्देश्य ‘गाजा शांति योजना’ को लागू करना है।’

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पार्टियों ने कहा कि ऐसे बोर्ड में भारत की भागीदारी फलस्तीन के मकसद के साथ बड़ा विश्चासघात होगा, जो ‘फलस्तीनी अधिकारों का सम्मान नहीं करता है।’’

उनका कहना है, ‘‘मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को खत्म करने के अमेरिकी प्रयास का दृढ़ता से विरोध किया जाना चाहिए। भारत सरकार को ऐसे प्रस्तावों से दूर रहना चाहिए और फलस्तीन और ’ग्लोबल साउथ’ के उन अन्य देशों की रक्षा में मजबूती से खड़ा होना चाहिए, जिन्हें अमेरिकी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं से खतरा है।’

ग्लोबल साउथ का तात्पर्य विकासशील एवं अल्प विकसित देशों से है।

भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा बनने का निमंत्रण मिला है।

भाषा हक हक माधव

माधव


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