गांधीनगर, 10 अप्रैल (भाषा) मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए गुजरात पुलिस ने ‘नारिट’ नामक एक अनोखा कृत्रिम मेधा (एआई) टूल विकसित किया है, जो मामले की बारीकियों को परखते हुए उसकी मजबूती और कमजोरियों का आकलन करेगा और साथ ही जांच अधिकारियों को वास्तविक समय में कानूनी मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर दोषसिद्धि दर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि जांच को पूरी तरह चूक-रहित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से तैयार ‘नारिट’ (नारकोटिक्स एनालिसिस एंड आरएजी-बेस्ड इन्वेस्टिगेशन टूल) इतना सक्षम है कि यह स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय के फैसलों के आधार पर अदालत में संभावित दलीलों का पूर्वानुमान लगा सकता है और उनके सटीक जवाब भी सुझा सकता है।
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह ‘रिट्रीवल ऑगमेंटेड जेनरेशन’ (आरएजी) आधारित एक उन्नत प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जटिल मादक पदार्थ मामलों से प्रभावी ढंग से निपटने में सहायता देने के लिए विकसित किया गया है।
पश्चिम रेलवे, वडोदरा के पुलिस अधीक्षक अभय सोनी ने बताया कि पहले जांच केवल विशेष प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा की जाती थी, जिससे कार्यभार बढ़ता था और प्रशासनिक देरी होती थी।
उन्होंने कहा कि यह एप्लिकेशन नवीनतम तकनीक का उपयोग कर ‘कार्यकुशलता को कई गुना बढ़ाने वाले उपकरण’ के रूप में काम करेगा, जिससे हर जांच अधिकारी प्रक्रिया के अनुरूप और सटीक जांच कर सकेगा तथा एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि दर में सुधार होगा।
विज्ञप्ति के मुताबिक, पश्चिम रेलवे पुलिस के वडोदरा मंडल द्वारा मुंबई स्थित एक एआई स्टार्टअप के सहयोग से विकसित इस टूल की परिकल्पना पुलिस महानिदेशक के. एल. एन. राव और सूरत शहर के पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत के मार्गदर्शन में की गई, जबकि इसकी पहल पुलिस अधीक्षक अभय सोनी ने की।
भाषा खारी वैभव
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