गुजरात : चांदीपुरा वायरस से तीन बच्चों की मौत, चार का इलाज जारी

गुजरात : चांदीपुरा वायरस से तीन बच्चों की मौत, चार का इलाज जारी

गुजरात : चांदीपुरा वायरस से तीन बच्चों की मौत, चार का इलाज जारी
Modified Date: July 13, 2026 / 09:23 pm IST
Published Date: July 13, 2026 9:23 pm IST

गांधीनगर, 13 जुलाई (भाषा) गुजरात में पिछले कुछ हफ्तों में चांदीपुरा वायरस से संक्रमण के सात मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से तीन मरीजों की मौत हो गई और चार अन्य उपचाराधीन हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने सोमावार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि सभी मरीज 10 साल से कम उम्र के थे।

मंत्री ने राज्य में चांदीपुरा वायरस के प्रकोप की समीक्षा के लिए गांधीनगर में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहा कि वायरस के आठ संदिग्ध मरीजों की जांच रिपोर्ट का अब भी इंतजार है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग वायरस को नियंत्रित करने, मरीजों के इलाज और निगरानी के लिए लगातार काम कर रहा है।

चांदीपुरा वायरस से बुखार होता है, जिसके लक्षण फ्लू जैसे होते हैं, और इससे एक्यूट एन्सेफलाइटिस (दिमाग में सूजन) भी हो सकता है। यह वायरस रैब्डोविरिडे परिवार के वेसिकुलोवायरस जीनस का सदस्य है। यह मच्छर, किलनी और मक्खियों जैसे वाहकों से फैलता है।

मंत्री ने बताया, ‘‘वायरस के संदिग्ध 27 मरीजों के रक्त के नमूने पहले जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से सात के संक्रमित होने की पुष्टि हुई, जबकि 12 में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई। आठ मरीज़ों के नतीजे अभी आने बाकी हैं और उनके आज शाम (सोमवार) तक आने की उम्मीद है। संक्रमण की पुष्टि वाले तीन मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि चार अन्य मरीज का उपचार किया जा रहा है। इनमें दो मरीज गांधीनगर में, जबकि दो अन्य वडनगर (जिला मेहसाणा) में हैं।’’

पानशेरिया ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए)की मदद ले रहा है और गुजरात के बाल रोग विशेषज्ञों से कहा गया है कि वे इस बीमारी के प्रकोप से निपटने के लिए आपस में तालमेल बिठाकर काम करें।

उन्होंने कहा, ‘‘छोटे स्वास्थ्य केंद्रों और निजी क्लिनिक चलाने वाले चिकित्सकों को निर्देश दिया गया है कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध मामला मिलता है, तो वे समय बर्बाद न करें और तुरंत मरीजों को भर्ती करके उन्हें ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सुविधा दें, ताकि कीमती जानें बचाई जा सकें।’’

मंत्री ने कहा कि 2024 में राज्य में 61 जगहों से चांदीपुरा वायरस के मामले सामने आए, जहां स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों और ‘सैंड फ्लाई’ के पनपने को रोकने के लिए धूम्रीकरण किया गया और लोगों को जागरूक करने के कार्यक्रम शुरू किए।

यह वायरस सबसे पहले 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर ज़िले के चांदीपुरा गांव के एक मरीज से अलग किया गया था, इसलिए इसे चांदीपुरा वायरस के नाम से जाना जाता है।

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप


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