ज्ञानेश कुमार पिछली एसआईआर के दौरान किस राज्य के मतदाता थे: तृणमूल नेता साकेत गोखले

ज्ञानेश कुमार पिछली एसआईआर के दौरान किस राज्य के मतदाता थे: तृणमूल नेता साकेत गोखले

ज्ञानेश कुमार पिछली एसआईआर के दौरान किस राज्य के मतदाता थे: तृणमूल नेता साकेत गोखले
Modified Date: September 21, 2026 / 05:12 pm IST
Published Date: September 21, 2026 5:12 pm IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस नेता साकेत गोखले ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और सवाल किया कि 2002-03 के दौरान वह किस राज्य में मतदाता के रूप में पंजीकृत थे।

गोखले ने कहा कि ज्ञानेश कुमार दिल्ली की मतदाता सूची में मतदाता के रूप में दर्ज हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश, केरलम और दिल्ली में पिछली एसआईआर सूचियों में उनका नाम नहीं मिला, जबकि उत्तर प्रदेश में उनका जन्म हुआ था तथा दो अन्य राज्यों (केरलम और दिल्ली) में वह पदस्थापित रहे थे।

राज्यसभा के पूर्व सदस्य गोखले ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दिल्ली की मतदाता सूची में ‘ज्ञानेश कुमार पुत्र सुबोध कुमार’ नाम से कुमार पंजीकृत हैं।

उन्होंने कहा कि कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था, वह केरल कैडर के आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी रहे हैं और दिल्ली में भी उनकी तैनाती रही है।

गोखले ने कहा, ‘‘यदि किसी व्यक्ति का नाम 2002-2003 की एसआईआर से नहीं जोड़ा जा सकता है, तो उसे ‘तार्किक विसंगति’ के तौर पर चिह्नित किया जाता है और नोटिस जारी किया जाता है।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘ज्ञानेश कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ, वह केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और दिल्ली में भी तैनात रहे हैं। इसलिए मैंने इन तीनों राज्यों की पिछली एसआईआर में ‘ज्ञानेश कुमार, पिता सुबोध कुमार’ नाम खोजा। चौंकाने वाली बात है कि तीनों राज्यों की पिछली एसआईआर में इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला।’’

गोखले ने कहा कि यदि पिछली एसआईआर में ऐसी कोई प्रविष्टि नहीं है, तो मौजूदा मतदाता सूची में उनका नाम ‘तार्किक विसंगति’ के तौर पर चिह्नित किया जाना चाहिए था और उन्हें नोटिस मिलना चाहिए था।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या सीईसी ज्ञानेश कुमार भारत के नागरिक हैं?’’

तृणमूल नेता ने निर्वाचन आयोग से यह स्पष्ट करने की मांग की कि पिछली एसआईआर में ज्ञानेश कुमार का नाम किस राज्य में दर्ज है और क्या वह उस समय पंजीकृत मतदाता थे।

उन्होंने पूछा, ‘‘यदि केरल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की पिछली एसआईआर में उनका नाम नहीं है, तो मौजूदा मतदाता सूची में उनका नाम कैसे है? क्या ज्ञानेश कुमार को ‘तार्किक विसंगति’ और ‘अनमैप्ड वोटर’ होने के संबंध में कोई नोटिस मिला है?’’

उन्होंने कहा, ‘‘देश को इसकी जानकारी होनी चाहिए।’’

‘अनमैप्ड वोटर’ शब्दावली का इस्तेमाल ऐसे मतदाताओं के लिए किया जा रहा है जिनके खुद के या उनके माता-पिता के नाम 2002 या 2005 की एसआईआर प्रक्रिया के बाद तैयार की गई अंतिम मतदाता सूची में नहीं मिले हैं।

निर्वाचन आयोग या सीईसी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

गोखले की यह टिप्पणी दिल्ली में जारी एसआईआर के दौरान कई राजनीतिक नेताओं और जानी-मानी हस्तियों को नोटिस जारी किए जाने को लेकर उपजे विवाद के बीच आई है।

अधिकारियों ने रविवार को बताया था कि पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और निर्वाचन आयुक्त एस एस संधू सहित कई प्रमुख लोगों को उनके एसआईआर संबंधी विवरण में ‘‘विसंगतियों’’ को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं।

निर्वाचन आयोग ने एसआईआर के तहत 97 लाख से अधिक मतदाताओं वाली मसौदा मतदाता सूची जारी की है और 33.13 लाख मतदाताओं को उनके द्वारा भरे गए गणना प्रपत्रों में ‘‘विसंगतियों’’ को लेकर नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

भाषा

हक हक सुभाष

सुभाष


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