हल्द्वानी वन प्रभाग ने एआई-आधारित वन ध्वनि निगरानी प्रणाली पेश की

हल्द्वानी वन प्रभाग ने एआई-आधारित वन ध्वनि निगरानी प्रणाली पेश की

हल्द्वानी वन प्रभाग ने एआई-आधारित वन ध्वनि निगरानी प्रणाली पेश की
Modified Date: September 9, 2026 / 07:27 pm IST
Published Date: September 9, 2026 7:27 pm IST

हल्द्वानी, नौ सितंबर (भाषा) उत्तराखंड में हल्द्वानी वन प्रभाग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित भारत की पहली वन ध्वनि निगरानी प्रणाली का सफल प्रदर्शन किया है। यह प्रणाली पेड़ों की अवैध कटाई और वन्यजीवों के शिकार जैसे अपराधों का पता लगाने में सक्षम है। इसे देश में वनों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि खास तौर पर स्थानीय वन परिस्थितियों के हिसाब से तैयार की गई यह प्रणाली एआई, ‘एज कंप्यूटिंग’, ध्वनि सेंसर और लंबी दूरी की वायरलेस संचार प्रौद्योगिकी को एकीकृत करती है।

उन्होंने बताया कि इस प्रणाली से जंगल में होने वाली आवाजों पर लगातार नजर रखने के साथ ही संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान की जा सकती है, यहां तक कि दूर-दराज के उन इलाकों में भी, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।

हल्द्वानी के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) कुंदन कुमार के मुताबिक, यह प्रणाली सौर ऊर्जा और रिचार्ज करने योग्य बैटरियों से संचालित होती है, जिससे दूरदराज के वन क्षेत्रों में बिजली ग्रिड की सुविधा न होने पर भी इसके लिए लगातार 24 घंटे निगरानी करना मुमकिन हो पाता है।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक निगरानी प्रणालियों के विपरीत, जो काफी हद तक मानव गश्त और समय-समय पर किए जाने वाले निरीक्षणों पर निर्भर करती हैं, वन ध्वनि निगरानी प्रणाली जंगल के भीतर एक “स्मार्ट डिजिटल कान” के रूप में काम करती है।

कुमार के अनुसार, एआई संचालित ध्वनि सेंसर जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में उत्पन्न होने वाली आवाजों का लगातार विश्लेषण करते हैं और सुरक्षा एवं पारिस्थितिकी के लिहाज से अहम घटनाओं को खुद बखुद पहचान लेते हैं।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “एआई आधारित निगरानी प्रणाली एक नयी और स्वदेशी प्रौद्योगिकी है, जो जंगल की सुरक्षा, अवैध शिकार रोकने और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नये युग की शुरुआत करती है।”

भारतीय वन सेवा के 2017 बैच के अधिकारी कुमार ने बताया कि इस प्रणाली को यंत्र चालित आरी चलाए जाने, कुल्हाड़ी से पेड़ काटे जाने, गोली चलाए जाने, वाहनों की आवाजाही, इंसानी घुसपैठ, वन्यजीवों की हरकत और संदिग्ध मानवीय गतिविधियों के दौरान उत्पन्न होने वाली ध्वनियों को पहचानने के लिए पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि जब भी कोई संदिग्ध गतिविधि पकड़ में आती है, तो एआई ‘एज कंप्यूटिंग’ उपकरण पर स्थानीय स्तर पर ही आवाज का विश्लेषण करता है और लंबी दूरी की संचार नेटवर्क प्रणाली के जरिये तुरंत वन नियंत्रण कक्ष को अलर्ट भेज देता है, जिससे फील्ड कर्मचारियों को तेजी से घटनास्थल पर भेजना संभव हो पाता है और प्रतिक्रिया देने में लगने वाला समय काफी घट जाता है।

कुमार ने कहा कि इस प्रौद्योगिकी से पेड़ों की अवैध कटाई, लकड़ी की तस्करी, वन्यजीवों के शिकार और ऐसे अन्य अपराधों के खिलाफ एक प्रभावी पूर्व चेतावनी तंत्र उपलब्ध होगा, जिससे वन संरक्षण के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि ‘रियल-टाइम’ (वास्तविक समय) में संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने की क्षमता से संवेदनशील वन क्षेत्रों, संरक्षित इलाकों और वन्यजीव प्रवासों में निगरानी काफी मजबूत होगी, साथ ही अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों की कार्यक्षमता और सुरक्षा में भी सुधार आएगा।

कुमार के मुताबिक, यह प्रौद्योगिकी कानून प्रवर्तन के अलावा वन्यजीव संरक्षण और जैव-विविधता की निगरानी के क्षेत्र में भी खासी मददगार साबित होगी।

उन्होंने बताया कि एआई आधारित प्रणाली विभिन्न वन्यजीवों की आवाजों को खुद ब खुद पहचान सकती है, जिससे जंगल में उनकी मौजूदगी, आवाजाही और आवास के इस्तेमाल की लगातार निगरानी करना संभव हो जाता है।

भाषा पारुल अविनाश

अविनाश


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