उत्पीड़न प्रकरण:उच्च न्यायालय में प्राथमिकी रद्द करने की आईपीएस अधिकारी की अर्जी पर सुनवाई टली
उत्पीड़न प्रकरण:उच्च न्यायालय में प्राथमिकी रद्द करने की आईपीएस अधिकारी की अर्जी पर सुनवाई टली
हैदराबाद, 22 जुलाई (भाषा) तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी की उस याचिका पर सुनवाई 27 जुलाई तक टाल दी जिसमें उसने एक महिला सह प्रशिक्षु अधिकारी के कथित यौन उत्पीड़न को लेकर उसके विरूद्ध दर्ज की गयी प्राथमिकी को खारिज करने का अनुरोध किया है।
प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी (32) के खिलाफ सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एसवीपीएपीए) में एक महिला प्रशिक्षु का ‘पीछा करने और यौन उत्पीड़न’ करने को लेकर 18 जुलाई को मामला दर्ज किया गया था। आरोपी ने तेलंगाना उच्च न्यायालय से यह प्राथिमिकी खारिज करने का अनुरोध किया है।
बुधवार को जब यह मामला उच्च न्यायालय के सामने आया, तो याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई का अनुरोध किया, जबकि सरकारी वकील ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा। इसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 27 जुलाई तय कर दी।
तीस वर्षीय महिला प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि एक प्रशिक्षु अधिकारी 23 जून से ही ‘इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप’ के ज़रिए उसे यौन रूप से आपत्तिजनक संदेश भेजकर तथा अकादमी में दोस्तों के सामने उसके बारे में अपमानजनक बातें कर उसे परेशान कर रहा है।
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसपर एक अन्य प्रशिक्षु के साथ यौन संबंध बनाने का झूठा आरोप लगाया, उसपर ऐसे संबंध को कबूल करने का दबाव डाला एवं उसके विरूद्ध अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया।
उसने यह भी आरोप लगाया कि नौ जुलाई को आरोपी उसे जबरदस्ती अपने कमरे में ले गया, उसने उसके बाल पकड़े, गला घोंटने की कोशिश की, उसकी गर्दन पर चाकू रखा और उसे कमरे से बाहर जाने से रोका।
शिकायतकर्ता ने उस पर आरोप लगाया कि प्रशिक्षु आईपीएस ने उसकी जानकारी या सहमति के बिना उसका एक निजी वीडियो रिकॉर्ड किया और ब्लैकमेल करने के प्रयास में उसे उसके पति को भेज दिया।
पुलिस ने बताया कि शिकायत के आधार पर, अट्टापुर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता तथा सूचना प्रौद्योगिकी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
आरोपी प्रशिक्षु अधिकारी 20 जुलाई को यहां एक फ्लैट में बेहोश मिला था जिसके बाद उसे उसके भाई और दोस्तों ने अस्पताल में भर्ती कराया था। उन्हें शक था कि आरोपी ने कोई हानिकारक चीज़ खा ली होगी।
हालांकि, इलाज करने वाले डॉक्टर ने कहा कि ‘गैस्ट्रिक लैवेज’ (पेट की धुलाई) के बाद कुछ भी असामान्य नहीं मिला और उसकी हालत स्थिर थी।
आरोपी प्रशिक्षु अधिकारी पहले आंध्र प्रदेश पुलिस में आरक्षी था।
भाषा राजकुमार पवनेश
पवनेश

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