हरिप्रसाद ने केपीसीसी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला; भाजपा-संघ पर साधा निशाना
हरिप्रसाद ने केपीसीसी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला; भाजपा-संघ पर साधा निशाना
बेंगलुरु, 21 जून (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बी के हरिप्रसाद ने रविवार को यहां एक अधिवेशन में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने पार्टी का झंडा सौंपकर हरिप्रसाद को औपचारिक रूप से जिम्मेदारी सौंपी। शिवकुमार ने 2020 से अब तक कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है।
कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, कांग्रेस महासचिव (कर्नाटक प्रभारी) रणदीप सिंह सुरजेवाला के अलावा कई मंत्री, विधायक और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए।
विधान परिषद सदस्य हरिप्रसाद (71) को तीन जून को केपीसीसी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्हें यह पद शिवकुमार के कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी पद से इस्तीफा देने के बाद मिला है।
बिल्लव समुदाय से आने वाले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) नेता हरिप्रसाद हाल ही में कर्नाटक विधान परिषद के लिए पुनः निर्वाचित हुए हैं। वह इससे पहले राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और हरियाणा सहित कई राज्यों में कांग्रेस प्रभारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी ने इस कार्यक्रम को आगामी चुनाव के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) के तहत आने वाले पांच नगर निगम, जिला और तालुक पंचायतों के चुनाव से लेकर 2028 का विधानसभा चुनाव शामिल है।
पद संभालने के बाद हरिप्रसाद ने कहा कि उन्होंने जो पद संभाला है, वह कोई सत्ता नहीं, बल्कि एक ‘‘पवित्र जिम्मेदारी’’ है।
उन्होंने कहा कि पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2028 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव हैं।
भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वे ‘‘संवैधानिक संस्थाओं का गलत इस्तेमाल’’ कर रहे हैं और लोकतंत्र और संविधान को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
हरिप्रसाद ने दोनों संगठनों को ‘‘संविधान-विरोधी और लोकतंत्र-विरोधी’’ बताया और उनपर ‘‘लोगों की आज़ादी छीनने’’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस बारे में सावधान रहना होगा।’’
मतदाता सूची के विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) के बारे में आगाह करते हुए उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों का वोट देने का अधिकार छीनने के लिए इसके (एसआईआर के) गलत इस्तेमाल के खिलाफ लड़ें।
हरिप्रसाद ने भाजपा और आरएसएस को ‘कायर’ कहा और दावा किया, ‘‘उन्हें यह मौका इसलिए मिल रहा है, क्योंकि हम (कांग्रेस) चुप हैं।’’
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बारे में अपमानजनक बातें कहने के लिए उनकी आलोचना की।
कर्नाटक में कांग्रेस को सत्ता में लाने और वादे के मुताबिक पांच गारंटी योजनाओं को लागू करने के लिए मिलकर काम करने पर सिद्धरमैया और शिवकुमार की तारीफ़ करते हुए, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अगर पार्टी इसी तरह काम करती रही, तो वह एक बार फिर सत्ता में आ सकती है।
उन्होंने कहा कि हरिप्रसाद की जिम्मेदारी सभी को पार्टी से जोड़ने की थी।
खरगे ने कहा, ‘‘हरिप्रसाद पार्टी के लिए नये नहीं हैं, वह पार्टी में अलग-अलग पदों पर काम करते हुए आगे बढ़े हैं और आज केपीसीसी अध्यक्ष बने हैं; उन्होंने अलग-अलग राज्यों और अखिल भारतीय स्तर पर कई भूमिकाएं निभाई हैं।’’
अध्यक्ष खरगे ने कहा, ‘‘पार्टी ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष बनाना चाहती थी, जिसने जमीनी स्तर से पार्टी को मज़बूत करने के लिए काम किया हो, जो कार्यकर्ताओं को पहचानता हो और जिसने कांग्रेस की विचारधारा को अपने जीवन में उतारा हो, इसी वजह से हरिप्रसाद को अध्यक्ष बनाया गया और शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने के मामले में भी यही बात लागू होती है।’’
खरगे ने पार्टी सदस्यों से अनुशासन बनाए रखने को कहा और ज़ोर देकर कहा कि कांग्रेस में किसी एक व्यक्ति को ही सब कुछ मानने या ‘पर्सनैलिटी कल्ट’ की कोई जगह नहीं है।
उन्होंने हरिप्रसाद और शिवकुमार से कहा कि वे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पहचान करें और उन्हें बोर्ड और कॉर्पोरेशन का चेयरमैन या सदस्य बनाएं, साथ ही आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के लिए काम करें।
शिवकुमार ने केपीसीसी प्रमुख के तौर पर अपनी उपलब्धियों को याद करते हुए कहा कि हरिप्रसाद पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता और नेता हैं, जिन्होंने पूरे राज्य और देश में पार्टी की सेवा की है।
पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों के प्रति हरिप्रसाद की निष्ठा और समर्पण की तारीफ़ करते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि उन्होंने (हरिप्रसाद ने) एक आम पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर शुरुआत की थी और 1972 से पार्टी के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है।
वह युवा कांग्रेस और सेवा दल में रहे और कई राज्यों में पार्टी के प्रभारी भी रहे।
उन्होंने भाजपा पर ‘‘देश की विविधता को खत्म करने और धर्म, जाति एवं भाषा के नाम पर लोगों को बांटने’ की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह उन सभी के सामने एक चुनौती है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें भाजपा और आरएसएस की कोशिशों के खिलाफ मिलकर लड़ना होगा।’’
सिद्धरमैया ने कहा कि आरएसएस ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाना चाहता है और ऐसी सोच को न तो हकीकत में बदला जाना चाहिए और न ही इसे सफल होने देना चाहिए।
भाषा सुरेश नरेश
नरेश

Facebook


