हरिवंश का तीसरी बार उपसभापति चुना जाना प्रमाण है कि सदन को उन पर कितना भरोसा है : प्रधानमंत्री मोदी

हरिवंश का तीसरी बार उपसभापति चुना जाना प्रमाण है कि सदन को उन पर कितना भरोसा है : प्रधानमंत्री मोदी

हरिवंश का तीसरी बार उपसभापति चुना जाना प्रमाण है कि सदन को उन पर कितना भरोसा है : प्रधानमंत्री मोदी
Modified Date: April 17, 2026 / 05:29 pm IST
Published Date: April 17, 2026 5:29 pm IST

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को हरिवंश को तीसरी बार राज्यसभा का उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी और कहा कि उनका लगातार तीसरी बार इस पद के लिए चुना जाना अपने आप में गहरा प्रमाण है कि सदन को उन पर कितना भरोसा है।

सदन के मनोनीत सदस्य हरिवंश का उपसभापति के पद पर निर्वाचन निर्विरोध हुआ।

मोदी ने कहा कि सदन को अतीत में हरिवंश के अनुभव और सभी को साथ लेकर चलने के उनके प्रयासों से काफी लाभ हुआ है। उन्होंने कहा, “यह उनके अनुभव और सहज कार्यशैली का सम्मान है।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पूर्व में पत्रकार रहे हरिवंश ने पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखा। उन्होंने कहा कि हरिवंश ने अपनी सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपी-एलएडी) का उपयोग विभिन्न विश्वविद्यालयों में शोध परियोजनाओं के लिए किया है।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं में विश्वास जगाने में हरिवंश के योगदान की भी सराहना की।

सदन के नेता जेपी नड्डा ने हरिवंश के पक्ष में प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने ध्वनि मत से पारित कर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश का निर्वाचन उन पर सदन के गहरे विश्वास और संस्था में उनके बहुमूल्य अनुभव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उनका लगातार तीसरी बार उपसभापति चुना जाना सदन द्वारा उनके अनुभव, समावेशी दृष्टिकोण और गरिमामय कार्यशैली की स्वीकृति है।

मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती 17 अप्रैल के विशेष महत्व को रेखांकित किया। हरिवंश और चंद्रशेखर के घनिष्ठ संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उपसभापति ने उनकी राजनीतिक यात्रा में उनके सहयोगी के रूप में कार्य किया और उनके जीवन पर पुस्तकें भी लिखीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रशेखर की जयंती पर अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत करना इस अवसर को विशेष रूप से सार्थक बनाता है।

पत्रकारिता में हरिवंश के शानदार करियर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने उच्च मानकों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और प्रभावशाली लेखन की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने बताया कि गुजरात में अपने कार्यकाल के दौरान भी वह नियमित रूप से हरिवंश के लेख पढ़ते थे, जो गहन अध्ययन और दृढ़ विश्वास को दर्शाते हैं। मोदी ने कहा कि उनके लेखन में खरापन था, लेकिन उनका भाषण और व्यवहार हमेशा सौम्य और विनम्र रहा।

प्रधानमंत्री ने पत्रकारिता के दिनों में हरिवंश द्वारा लिखित ‘हमारा सांसद कैसा हो’ नामक स्तंभ श्रृंखला के माध्यम से किए गए उनके अग्रणी कार्य को रेखांकित किया। इस अनुभव के महत्व पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों सदनों के नए सांसद संसदीय आचरण, गरिमा और जिम्मेदारियों पर हरिवंश की अंतर्दृष्टि से बहुत कुछ सीख सकते हैं।

मोदी ने कहा कि शायद उन्हें तब यह नहीं पता था कि एक दिन वह स्वयं इस कुर्सी पर आसीन होंगे, लेकिन उनके लेखन ने इस विषय को असाधारण गहराई से प्रस्तुत किया।

प्रधानमंत्री ने हरिवंश की अनुकरणीय समयबद्धता, अनुशासित जीवन और कर्तव्यनिष्ठा को उनके सर्वमान्य व्यक्तित्व के प्रमुख कारक बताया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद से हरिवंश सदन में पूरी तरह से उपस्थित रहे हैं और अध्यक्षता नहीं करने पर भी सत्रों में भाग लेते हैं।

मोदी ने कहा कि यह उनके दायित्वों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और हम सभी के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। प्रधानमंत्री ने संसदीय कर्तव्यों से परे हरिवंश के उल्लेखनीय जनहितकारी कार्यों, विशेष रूप से युवाओं के साथ उनके जुड़ाव की ओर ध्यान दिलाया।

उन्होंने बताया कि 2018 में उपसभापति का पदभार संभालने के बाद से हरिवंश ने देश भर के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में 350 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने पर उपसभापति के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश ऐतिहासिक संदर्भों का उपयोग करके यह समझाते हैं कि भारत पहले अपेक्षित गति से प्रगति क्यों नहीं कर पाया और अब देश के लिए आगे बढ़ने के क्या अवसर मौजूद हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि हरिवंश द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों में आयोजित साहित्य उत्सवों में सक्रिय रूप से भाग लेकर समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित और प्रेरित कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने हरिवंश की 1994 में अमेरिका की पहली यात्रा से जुड़ा एक रोचक किस्सा सुनाया। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, जब हरिवंश से पूछा गया कि वह उस विकसित देश में क्या देखना चाहते हैं, तो उन्होंने विश्वविद्यालयों का दौरा करने की इच्छा व्यक्त की ताकि वे समझ सकें कि किस प्रकार की शिक्षा और संस्कृति ने ऐसी प्रगति को संभव बनाया है।

मोदी ने कहा कि उन्होंने उस यात्रा के दौरान अपना पूरा खाली समय अमेरिकी विश्वविद्यालयों के अध्ययन में व्यतीत किया, जो एक विकसित भारत के लिए शैक्षिक उत्कृष्टता के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने हरिवंश द्वारा एमपीलैड (सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना) निधि के अनुकरणीय उपयोग को अन्य सांसदों के लिए एक आदर्श बताया। प्रधानमंत्री ने उपसभापति द्वारा स्थापित विभिन्न अध्ययन और अनुसंधान केंद्रों का विस्तृत विवरण दिया, जिनमें आईआईटी पटना में लुप्तप्राय भारतीय भाषाओं का केंद्र, बिहार के क्षेत्रों की भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भूकंप इंजीनियरिंग केंद्र और पटना के आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में कटाव की समस्याओं के समाधान हेतु नदी अध्ययन केंद्र शामिल हैं।

शहरी क्षेत्र में स्थानांतरित होने के बावजूद उपसभापति के अपने गांव से निरंतर जुड़ाव की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि हरिवंश अपने गांव से गहराई से जुड़े हुए हैं।

भाषा अविनाश मनीषा

मनीषा


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