हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सरकारी अस्पतालों में शवगृह सुविधाएं सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सरकारी अस्पतालों में शवगृह सुविधाएं सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
चंडीगढ़, 16 जुलाई (भाषा) हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त शवगृह सुविधाएं सुनिश्चित करने, शवों के सम्मानजनक संरक्षण और फ्रीजर कक्षों को हर समय चालू हालत में रखने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने निर्देश दिया है कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध शवों को रखने में इस्तेमाल होने वाले सभी फ्रीजरों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाए और उन्हें हर समय कार्यशील रखा जाए, ताकि मृतकों और उनके परिजनों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने फरीदाबाद और सोनीपत से संबंधित दो अलग-अलग शिकायतों पर प्राप्त रिपोर्टों की समीक्षा के बाद हाल में ये निर्देश जारी किए। इस संबंध में संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
सोनीपत मामले में पानीपत निवासी शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि उनके 30 वर्षीय पुत्र की 18-19 जुलाई, 2024 की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल, सोनीपत भेजा गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि शव के संरक्षण, उचित देखभाल और पहचान की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई। उन्होंने कहा कि शवगृह में पर्याप्त संख्या में कार्यशील फ्रीजर उपलब्ध नहीं थे, जिससे शव के संरक्षण में कठिनाई हुई और शोकाकुल परिवार को भारी मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा।
शिकायतकर्ता ने आयोग से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का अनुरोध किया था।
फरीदाबाद मामले में आयोग ने बीके सिविल अस्पताल के शवगृह की सुविधाओं, शवों के संरक्षण की व्यवस्था और मृतकों के सम्मानजनक रखरखाव के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
अस्पताल प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में शव संरक्षण के लिए 14 फ्रीजर चैंबर हैं, जिनमें से 10 पूरी तरह कार्यशील हैं, जबकि चार नियमित रखरखाव के कारण अस्थायी रूप से बंद हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल में प्रतिदिन औसतन पांच से 10 पोस्टमार्टम किए जाते हैं और उपलब्ध कार्यशील फ्रीजर चैंबर सामान्य आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं।
आयोग ने कहा कि मृतकों की गरिमा की रक्षा करना और उनके शवों का सम्मानजनक संरक्षण सुनिश्चित करना स्वास्थ्य संस्थानों की मूलभूत जिम्मेदारी है तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
भाषा मनीषा प्रशांत
प्रशांत

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