उच्च न्यायालय ने बलात्कार से संबंधित मामले की सुनवाई बंद कमरे में करने का तेजपाल का आग्रह ठुकराया

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उच्च न्यायालय ने बलात्कार से संबंधित मामले की सुनवाई बंद कमरे में करने का तेजपाल का आग्रह ठुकराया

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  • Publish Date - November 24, 2021 / 07:35 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:52 PM IST

पणजी, 24 नवंबर (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को पत्रकार तरुण तेजपाल का वह अनुरोध अस्वीकार कर दिया जिसमे उन्होंने 2013 के बलात्कार मामले में उन्हें बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की बंद कमरे में सुनवाई करने का अनुरोध किया था।

तहलका पत्रिका के पूर्व मुख्य संपादक को इस साल मई में सत्र अदालत ने उन आरोपों से बरी किया था, जिसमें तेजपाल पर नवंबर 2013 में गोवा के पांच सितारा होटल की लिफ्ट में उनकी तत्कालीन महिला सहयोगी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। निचली अदालत के इस फैसले को राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय की गोवा पीठ के समक्ष चुनौती दी है।

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति एम.एस. जवलकर ने बुधवार को सीआरपीसी की धारा 327 के अंतर्गत बंद कमरे में अदालती कार्यवाही संबंधी तेजपाल का आवेदन खारिज कर दिया।

तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने अपने आवेदन के समर्थन में विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों और विधि आयोग का हवाला दिया।

देसाई ने कहा था कि उनके मुवक्किल को कुछ ऐसा कहना पड़ सकता है जो मामले के संबंध में कुछ तथ्यों को उजागर कर सकता है और जिसे मीडिया में प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन, ”इस मामले में मुझे अपना बचाव करने के मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।”

वहीं, गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि जिला अदालत का फैसला (तेजपाल को बरी करने का) सार्वजनिक है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने तेजपाल का आवेदन खारिज किया। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार की पुनरीक्षण याचिका पर अब छह दिसंबर को सुनवाई होगी।

भाषा शफीक अनूप

अनूप