स्वास्थ्य मंत्रालय ने चिकित्सा उपकरण नियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा

स्वास्थ्य मंत्रालय ने चिकित्सा उपकरण नियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा

स्वास्थ्य मंत्रालय ने चिकित्सा उपकरण नियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा
Modified Date: June 28, 2026 / 03:55 pm IST
Published Date: June 28, 2026 3:55 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जून (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विभिन्न जोखिम श्रेणियों के चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण लाइसेंस जारी करने की समयसीमा कम करने के लिए चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव किया है।

मंत्रालय ने रविवार को कहा कि राजपत्र में प्रकाशित मसौदा अधिसूचना का उद्देश्य गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन से संबंधित मानकों का निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करते हुए चिकित्सा उपकरणों की लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना है।

मंत्रालय ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य विभिन्न जोखिम श्रेणियों के चिकित्सा उपकरणों के लाइसेंस बनाने की समय-सीमा को युक्तिसंगत बनाना है। इस पहल का मकसद कारोबार में सुगमता को बढ़ावा देना, नियामकीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना तथा देश में उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उपकरणों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 के तहत चिकित्सा उपकरणों को जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों-‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ और ‘डी’ में वर्गीकृत किया गया है। इनमें श्रेणी डी में सबसे अधिक जोखिम वाले चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।

नियमों में प्रत्येक श्रेणी के लिए विनिर्माण लाइसेंस के आवेदनों के निपटारे की वैधानिक समयसीमा निर्धारित है।

प्रस्तावित संशोधनों के तहत इन समय-सीमाओं को कम करने का प्रस्ताव है, ताकि गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन के स्थापित मानकों से समझौता किए बिना नियामकीय मंजूरी अधिक तेजी से दी जा सके।

श्रेणी ‘बी’ के चिकित्सा उपकरणों के लिए विनिर्माण लाइसेंस जारी करने की समयसीमा 140 दिन से घटाकर 115 दिन करने का प्रस्ताव है। इस श्रेणी में बीपी मापने की मशीन, हाइपोडर्मिक सुई और पल्स ऑक्सीमीटर जैसे निम्न से मध्यम जोखिम वाले उपकरण आते हैं।

इसी तरह, श्रेणी सी और डी के चिकित्सा उपकरणों के लिए विनिर्माण लाइसेंस जारी करने की समयसीमा 105 दिन से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव किया गया है।

प्रस्तावित मसौदे के संशोधनों में लाइसेंस प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए भी स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसमें आवेदनों की जांच, अधिसूचित निकायों द्वारा ऑडिट, अनुपालन का सत्यापन तथा लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शामिल है। इससे नियामक व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता, पूर्वानुमान लगाने और दक्षता आने की उम्मीद है। इसका लाभ चिकित्सा उपकरण उद्योग के साथ-साथ रोगियों को भी मिलेगा, क्योंकि उनकी गुणवत्ता वाले चिकित्सा उपकरणों तक अधिक तेजी से पहुंच उपलब्ध हो सकेगी।

मसौदा अधिसूचना को सभी हितधारकों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक किया गया है। यह अधिसूचना आधिकारिक राजपत्र और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की वेबसाइट पर उपलब्ध है। हितधारकों से निर्धारित अवधि के भीतर अपनी आपत्ति और सुझाव भेजने को कहा गया है।

भाषा खारी दिलीप

दिलीप


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