एसटी/एससी को प्रमोशन में आरक्षण देने संबंधी केस में सुनवाई रही अधूरी, अब 29 अगस्त को
एसटी/एससी को प्रमोशन में आरक्षण देने संबंधी केस में सुनवाई रही अधूरी, अब 29 अगस्त को
नई दिल्ली। एसटी/एससी को प्रमोशन में आरक्षण देने से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में सुनवाई गुरुवार को भी अधूरी रही। अदालत इस बात पर सुनवाई कर रही है कि प्रमोशन में आरक्षण में अड़चन बनने वाले 2006 के फैसले पर दोबारा विचार हो सकता है या नहीं। मामले में अगली सुनवाई अब 29 अगस्त को होगी।
वर्ष 2006 में नागराज बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि किसी जाति के पिछड़ेपन पर आवश्यक आंकड़े जुटाए बिना प्रमोशन में आरक्षण नहीं दिया जा सकता। इसी निर्णय की वजह से सभी राज्यों में एससी/एसटी को प्रमोशन में रिजर्वेशन देने के लिए बनाए कानून रद्द होते रहे हैं।
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केंद्र और कई राज्य सरकारों की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट 2006 के दिए गए इस फैसले पर पुनर्विचार करे। तर्क दिया गया कि चूंकि एससी/एसटी जातियों में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता, इसलिए उन्हें प्रमोशन देते वक्त भी आंकड़े जुटाने की शर्त नहीं रखी जा सकती। आरक्षण हजारों सालों तक वंचित रखे गए तबके को बराबरी का दर्जा देने का साधन है। इसलिए इसे ऐसी शर्तों में बांधना ठीक नहीं है।
गुरुवार को आरक्षण विरोधी पक्ष ने दलील दी कि एक बार नौकरी पाने के बाद प्रमोशन का आधार योग्यता होनी चाहिए। आंकड़े जुटाए बिना प्रमोशन में आरक्षण न देने की शर्त सही है। तमाम सरकारें इससे बचना चाहती हैं, क्योंकि उनका मकसद राजनीतिक लाभ है।
वेब डेस्क, IBC24

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