शबरिमला सोना चोरी मामले की जांच बेहद धीमी, सरकार असंतुष्ट: मंत्री मुरलीधरन

शबरिमला सोना चोरी मामले की जांच बेहद धीमी, सरकार असंतुष्ट: मंत्री मुरलीधरन

शबरिमला सोना चोरी मामले की जांच बेहद धीमी, सरकार असंतुष्ट: मंत्री मुरलीधरन
Modified Date: July 23, 2026 / 12:39 pm IST
Published Date: July 23, 2026 12:39 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 23 जुलाई (भाषा) केरल के देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने बृहस्पतिवार को कहा कि शबरिमला मंदिर से कथित सोना चोरी के मामले की जांच बहुत धीमी गति से चल रही है और राज्य सरकार इससे असंतुष्ट है।

मुरलीधरन ने संवाददाताओं से कहा कि मामले में गिरफ्तारियां तो की जा रही हैं, लेकिन अभी तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि यदि इस महीने के अंत तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया जाता है, तो सरकार जांच की धीमी गति को लेकर केरल उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी असंतुष्टि व्यक्त करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘हम जांच की धीमी रफ्तार के मूकदर्शक नहीं बने रह सकते।’’

मंत्री ने यह टिप्पणी शबरिमला सोना चोरी मामले में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व अध्यक्ष पी. एस. प्रशांत को हिरासत में लिए जाने संबंधी सवालों के जवाब में की।

उन्होंने कहा कि सरकार जांच की धीमी गति से संतुष्ट नहीं है, लेकिन विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा आरोपपत्र दाखिल किए जाने तक वह कोई कदम नहीं उठा सकती।

प्रशांत ने हिरासत में लिए जाने से पहले सोशल मीडिया पर यह दावा किया था कि उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है। इस पर मंत्री ने कहा कि पूर्व टीडीबी अध्यक्ष से पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के कार्यकाल में ही पूछताछ की गई थी।

उन्होंने कहा कि एसआईटी की ताजा कार्रवाई उस समय हुई पूछताछ का परिणाम हो सकती है।

मुरलीधरन ने कहा कि सरकार ने किसी भी स्तर पर एसआईटी की जांच में हस्तक्षेप नहीं किया है। उन्होंने कहा कि न तो जांच अधिकारियों को बुलाया गया, न उनसे कोई राय मांगी गई और न ही कोई सुझाव दिया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैंने कई अवसरों पर सरकार की ओर से जांच की बेहद धीमी गति पर असंतोष जरूर व्यक्त किया है।’’

मंत्री ने यह भी कहा कि प्रशांत के खिलाफ एसआईटी की कार्रवाई के बाद एलडीएफ अब यह दावा नहीं कर सकता कि शबरिमला सोना चोरी मामले से उसका कोई संबंध नहीं है।

इस बीच, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष के. जयकुमार ने कहा कि प्रशांत के खिलाफ एसआईटी की कार्रवाई के बाद बोर्ड की जिम्मेदारी और बढ़ गई है कि श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा की जाए तथा लोगों को यह भरोसा दिलाया जाए कि शबरिमला मंदिर में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है।

एसआईटी वर्ष 2019 में शबरिमला मंदिर के द्वारपालक विग्रहों और श्रीकोविल (गर्भगृह) के द्वारों को इलेक्ट्रोप्लेटिंग के लिए ले जाए जाने के दौरान कथित रूप से सोना गायब होने से जुड़े दो मामलों की जांच कर रही है।

एसआईटी ने हाल ही में केरल उच्च न्यायालय को बताया था कि वह वर्ष 2025 में हुई इसी तरह की इलेक्ट्रोप्लेटिंग प्रक्रिया की भी जांच कर रही है। उस समय पी. एस. प्रशांत त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के अध्यक्ष थे।

प्रशांत वर्ष 2023 से 2025 तक बोर्ड के अध्यक्ष रहे।

केरल उच्च न्यायालय में हाल ही में दाखिल एक रिपोर्ट में एसआईटी ने कहा है कि सितंबर 2025 में इलेक्ट्रोप्लेटिंग के दौरान कथित रूप से सोने की चोरी की जांच को भी द्वारपालक विग्रह से जुड़े मामले के साथ जोड़ दिया गया है।

भाषा मनीषा वैभव

वैभव


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