उच्च न्यायालय ने थरूर के व्यक्तित्व अधिकारों को संरक्षित किया, ‘डीपफेक’ वीडियो हटाने का आदेश
उच्च न्यायालय ने थरूर के व्यक्तित्व अधिकारों को संरक्षित किया, ‘डीपफेक’ वीडियो हटाने का आदेश
नयी दिल्ली,10 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के व्यक्तित्व अधिकारों को संरक्षित करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ को कृत्रिम मेधा (एआई) निर्मित वह ‘डीपफेक’ वीडियो हटाने का निर्देश दिया है, जिसमें उन्हें कथित रूप से पाकिस्तान की कूटनीति की प्रशंसा करते हुए दिखाया गया।
शशि थरूर की ओर से दायर मुकदमे पर अंतरिम आदेश देते हुए न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने तिरुवनंतपुरम सांसद के नाम, तस्वीर, विशिष्ट आवाज, भाषण की पहचान बन चुकी शैली, बेहद परिष्कृत शब्दावली और उनकी सार्वजनिक पहचान से जुड़ी अन्य विशेषताओं के दुरुपयोग पर भी रोक लगा दी।
अदालत ने निर्देश दिया कि इन विशेषताओं का इस्तेमाल कर किसी भी भौतिक या डिजिटल मंच पर व्यावसायिक, राजनीतिक या दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से ‘डीपफेक’, आवाज की नकली रिकॉर्डिंग या इस तरह की अन्य सामग्री तैयार व प्रसारित नहीं की जाएगी।
अदालत ने मेटा को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि इंस्टाग्राम पर मौजूद जिन आपत्तिजनक रील की पहुंच पहले ही अवरुद्ध जा चुकी है, वे आगे भी उपलब्ध न हों।
थरूर ने इससे पहले उन ‘डीपफेक’ वीडियो के बार-बार प्रसारित होने के खिलाफ अदालत का रुख किया था, जिनमें उन्हें कथित रूप से ‘‘राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील’’ बयान देते हुए दिखाया गया था।
उनके वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि ऐसी सामग्री न केवल उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को भी नुकसान पहुंचाती है।
न्यायमूर्ति पुष्कर्णा ने अंतरिम आदेश में कहा कि थरूर एक ‘‘सम्मानित हस्ती’’ हैं, जिन्हें अपने व्यक्तित्व के उपयोग पर ‘‘एकमात्र अधिकार’’ प्राप्त है और अनुमति के बिना उनकी सार्वजनिक पहचान से जुड़ी अन्य विशेषताओं का दुरुपयोग और उससे होने वाली प्रतिष्ठा की क्षति रोके जाने योग्य है।
हाल में उच्च न्यायालय ने क्रिकेटर गौतम गंभीर और अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा, अभिनेता विवेक ओबेरॉय और अल्लू अर्जुन के व्यक्तित्व अधिकारों को भी अंतरिम राहत देकर संरक्षित किया था।
भाषा खारी गोला
गोला

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