निकाय चुनाव पर उच्च न्यायालय का फैसला राज्य सरकार की बड़ी हार: अशोक गहलोत
निकाय चुनाव पर उच्च न्यायालय का फैसला राज्य सरकार की बड़ी हार: अशोक गहलोत
जयपुर, 22 मई (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पंचायत व निकाय चुनाव करवाए जाने को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले को लोकतंत्र के हित में बताया और इसे राज्य सरकार की बड़ी हार करार दिया है।
गहलोत ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि पंचायत और निकाय चुनाव से लगातार भाग रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार को आज उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है और चुनाव न करवाने की इनकी कोई भी तिकड़म काम नहीं आई है।
उन्होंने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय द्वारा 31 जुलाई 2026 तक चुनाव करवाए जाने का फैसला लोकतंत्र के हित में है और सरकार की बड़ी हार है।’’
उल्लेखनीय है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि पंचायत और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जुलाई तक करवाए जाएं।
इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सरकार ने चुनाव न कराने पड़ें इसलिए बेहद बचकाने बहाने बनाए। कभी भीषण गर्मी, कभी स्कूलों में नए सत्र, कभी बारिश जैसे कारण बताए गए। इससे पहले भी अदालत ने 15 अप्रैल तक चुनाव करवाए जाने का आदेश दिया था लेकिन इस संविधान विरोधी सरकार ने अदालत के आदेशों की पालना तक नहीं की थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘खैर, अब तो इनके बचने के सारे रस्ते बंद हो चुके हैं और इन्हें जनता के सामने जाना ही पड़ेगा। राजस्थान की जनता इस सरकार को इतने कुशासन, भ्रष्टाचार और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के लिए माकूल जवाब देने का इंतजार कर रही है।’’
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी अदालत के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, ‘‘राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय चुनाव 31 जुलाई तक संपन्न कराने का आदेश स्वागत योग्य है।’’
उन्होंने इसे लोकतंत्र और कांग्रेस पार्टी के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत बताया।
जूली ने कहा, ‘‘इस फैसले ने भाजपा सरकार की लोकतंत्र-विरोधी मानसिकता को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। जनता के बीच जाने से बचने के लिए सरकार लगातार चुनाव टालने की साजिश रच रही थी, लेकिन माननीय न्यायालय के इस निर्णय ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया, यह प्रदेश की जनता की जीत है।’’
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, ‘‘यह फैसला भाजपा सरकार की लगातार बहानेबाजी और संवैधानिक जिम्मेदारियों से भागने की सिसायत पर करारा तमाचा है।’’
भाषा पृथ्वी गोला
गोला

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