78 आरपीएम का इतिहास: संग्राहक के पास टैगोर व सुचित्रा सेन के दुर्लभ रिकॉर्ड संरक्षित

78 आरपीएम का इतिहास: संग्राहक के पास टैगोर व सुचित्रा सेन के दुर्लभ रिकॉर्ड संरक्षित

78 आरपीएम का इतिहास: संग्राहक के पास टैगोर व सुचित्रा सेन के दुर्लभ रिकॉर्ड संरक्षित
Modified Date: March 6, 2026 / 04:42 pm IST
Published Date: March 6, 2026 4:42 pm IST

(सुप्रतीक सेनगुप्त)

कोलकाता, छह मार्च (भाषा) अगस्त 1959 में बांग्ला फिल्म जगत की मशहूर अभिनेत्री सुचित्रा सेन ने कोलकाता स्थित भारतीय ग्रामोफोन कंपनी के कार्यालय में खुद की आवाज में एक गीत रिकॉर्ड कराया और एक दुर्लभ ‘78 आरपीएम’ वाला ‘ रिकॉर्ड’ वहीं छोड़ दिया।

‘चक्कर प्रति मिनट’ (आरपीएम) पुराने ग्रामोफोन रिकॉर्ड की गति को दर्शाता है। गीत ‘बोने नोय आज मोने होय…’ रिकॉर्ड करने के बाद संगीतकार और गीतकार ने ‘टेक ओके’ का ऐलान करते हुए सार्वजनिक रिलीज के लिए प्रायोगिक डिस्क की और प्रतियां बनाने की अनुमति दे दी थी।

दशकों पहले 1935 में रवींद्रनाथ टैगोर ने उसी परिसर में अपनी कविता ‘झूलन’ की एक टेस्ट डिस्क रिकॉर्ड कराई थी।

गुरूदेव की स्वयं की आवाज वाली वह रिकॉर्डिंग पांच साल बाद सार्वजनिक रूप से जारी की गई। 78 आरपीएम वाले ये रिकॉर्ड 1898 से लेकर 1950 के दशक के उत्तरार्ध तक निर्मित नाजुक शेलैक डिस्क हैं, जो प्रति मिनट 78 चक्कर की मामूली गति से घूमते हैं।

आमतौर पर 10 या 12 इंच आकार के इन रिकॉर्ड में एक तरफ तीन से पांच मिनट का ऑडियो रिकॉर्ड किया जा सकता है।

रिकॉर्ड का युग (ग्रामोफोन डिस्क से लेकर कैसेट और सीडी तक) बहुत पहले ही डिजिटल युग में परिवर्तित हो चुका है। फिर भी संग्राहक इतिहास के इन नाजुक टुकड़ों को संरक्षित करना जारी रखे हुए हैं।

शहर के संग्राहक परमानंद चौधरी उन लोगों में से हैं जिन्होंने ऐसे दुर्लभ रिकॉर्डों को एकत्र करने में वर्षों का समय समर्पित किया है।

चौधरी कहते हैं कि उनके संग्रह में सैकड़ों डिस्क हैं, जिनमें सेन की प्रायोगिक रिकॉर्डिंग और टैगोर की खुद उनकी आवाज में गाई गई एकमात्र प्रायोगिक डिस्क शामिल है।

भारत में रिकॉर्डिंग का इतिहास 1902 से शुरू होता है, जब कुछ शुरुआती डिस्क रिकॉर्ड की गई थीं। इसके तुरंत बाद, दिग्गज गायिका गौहर जान की रिकॉर्डिंग व्यापक रूप से प्रसारित होने लगीं।

चौधरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि किसी गाने के अंतिम संस्करण को मंजूरी देने से पहले, आमतौर पर एक टेस्ट रिकॉर्ड तैयार किया जाता था।

उन्होंने कहा कि टेस्ट डिस्क सुनने के बाद, कभी-कभी प्रस्तुति में बदलाव किए जाते थे। यदि रिकॉर्डिंग संतोषजनक मानी जाती थी, तो टेस्ट रिकॉर्डिंग को मंजूरी दे दी जाती थी और डिस्क को व्यावसायिक उपयोग के लिए जारी कर दिया जाता था।

भाषा संतोष नरेश

नरेश


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