चिकित्सा उपकरणों से जुड़े प्रतिकूल मामलों की निगरानी और रिपोर्टिंग बढ़ाने के अस्पतालों को निर्देश

चिकित्सा उपकरणों से जुड़े प्रतिकूल मामलों की निगरानी और रिपोर्टिंग बढ़ाने के अस्पतालों को निर्देश

चिकित्सा उपकरणों से जुड़े प्रतिकूल मामलों की निगरानी और रिपोर्टिंग बढ़ाने के अस्पतालों को निर्देश
Modified Date: September 21, 2026 / 07:46 pm IST
Published Date: September 21, 2026 7:46 pm IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) देशभर के अस्पतालों से कहा गया है कि वे ‘मैटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ़ इंडिया’ (एमवीपीआई) के अद्यतन दिशानिर्देश के तहत चिकित्सा उपकरणों से जुड़े संदिग्ध प्रतिकूल मामलों जिनमें उपकरणों में खराबी, नुकसान पहुंचाने की आशंका और प्रदर्शन में विफलता जैसे मामले शामिल हैं, की निगरानी और तुरंत रिपोर्टिंग के लिए व्यवस्थित तंत्र बनाएं।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भारत और अन्य राष्ट्रीय हितधारकों के सहयोग से भारत में चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी घटनाओं और प्रतिकूल मामलों की रिपोर्टिंग के लिए अस्पतालों हेतु दिशानिर्देश दस्तावेज (संस्करण 1.3) तैयार किया है।

इसका उद्देश्य चिकित्सा उपकरणों से जुड़े प्रतिकूल मामलों की पहचान, दस्तावेजीकरण, आकलन और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को मजबूत करना है।

दस्तावेज के अनुसार, सभी संदिग्ध चिकित्सा उपकरण प्रतिकूल घटनाओं (एमडीएई) की तुरंत रिपोर्ट की जानी चाहिए, भले ही चिकित्सा उपकरण और संबंधित घटना के बीच सीधा संबंध साबित हुआ हो या नहीं।

दस्तावेज में कहा गया है, ‘‘संदिग्ध घटनाओं की शुरुआती रिपोर्टिंग से समय पर आकलन, जांच, सुरक्षा संकेतों की पहचान और मरीजों एवं उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए उचित सुधारात्मक या निवारक कदम उठाने में मदद मिलती है।’’

रिपोर्टिंग व्यवस्था के तहत मृत्यु या स्वास्थ्य में गंभीर गिरावट जैसी प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्ट एमवीपीआई को 15 दिनों के भीतर करनी होगी। वहीं, ऐसी गैर-गंभीर प्रतिकूल घटनाएं जिनसे गंभीर नुकसान होने की आशंका हो, उनकी रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर करनी होगी। संदिग्ध और अप्रत्याशित गंभीर प्रतिकूल घटनाओं की सूचना संबंधित लाइसेंस प्राधिकरण को 15 दिनों के भीतर देनी होगी।

दिशानिर्देश में कहा गया है कि यदि किसी घटना की रिपोर्ट करने को लेकर कोई संदेह हो तो उसे रिपोर्ट करना बेहतर होगा। इसमें उपकरण में खराबी या उसकी क्षमता में कमी, गलत या मानकों के अनुरूप नहीं आने वाले परीक्षण परिणाम, डिजाइन संबंधी खामियां, लेबलिंग में गलतियां, गंभीर जनस्वास्थ्य खतरे और उपकरण के इस्तेमाल में हुई गलतियों को ऐसी घटनाओं में शामिल किया गया है, जिनकी रिपोर्ट की जानी चाहिए।

भाषा शोभना अविनाश

अविनाश


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