‘मानव जीवन क्षणभंगुर है’: न्यायालय ने अपना फैसला 27वें जन्मदिन से चार दिन पहले जान गंवाने वाले ‘लॉ क्लर्क’ को समर्पित किया

‘मानव जीवन क्षणभंगुर है’: न्यायालय ने अपना फैसला 27वें जन्मदिन से चार दिन पहले जान गंवाने वाले ‘लॉ क्लर्क’ को समर्पित किया

‘मानव जीवन क्षणभंगुर है’: न्यायालय ने अपना फैसला 27वें जन्मदिन से चार दिन पहले जान गंवाने वाले ‘लॉ क्लर्क’ को समर्पित किया
Modified Date: September 29, 2026 / 08:11 pm IST
Published Date: September 29, 2026 8:11 pm IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने एक दुर्लभ कदम के तहत मंगलवार को अपना एक फैसला अपने ‘लॉ क्लर्क’ सह शोधार्थी को समर्पित किया, जिनकी 27वें जन्मदिन से चार दिन पहले मौत हो गई थी और उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत एक आरोपी की हिरासत से जुड़े मामले में सहायता की थी।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने रित्विक देसवाल के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त किया। देसवाल न्यायमूर्ति दत्ता के कार्यालय में ‘लॉ क्लर्क’ सह शोधार्थी के रूप में कार्यरत थे।

पीठ ने कहा, ‘‘मानव जीवन क्षणिक है। फिर भी, सामान्य जीवन जीते हुए हम शायद ही कभी यह समझने के लिए रुकते हैं कि यह कितना क्षणभंगुर है; और जब जीवन अंततः हमें उसकी क्षणभंगुरता से रूबरू कराता है, तो अक्सर यह अहसास बहुत देर से होता है। इसी भावना के साथ हम शुरुआत में ही एक असामान्य आधार पर आगे बढ़ रहे हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हमारे सबसे प्रिय ‘लॉ क्लर्क’ सह शोधार्थी में से एक, रित्विक देसवाल, अपने 27वें जन्मदिन (जो आज ही है) से चार दिन पहले इस दुनिया से विदा हो गए। हम यह फैसला सुना रहे हैं, जिस पर उनके अंतिम कार्यों की अमिट छाप है। इस फैसले को तैयार करने में उनके द्वारा दी गई अमूल्य शोध सहायता के लिए हम उनकी सराहना करना चाहते हैं।”

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश


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