मानवाधिकार आयोग ने हरियाणा के बास्केटबॉल कोर्ट में किशोर की मौत पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी

मानवाधिकार आयोग ने हरियाणा के बास्केटबॉल कोर्ट में किशोर की मौत पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी

मानवाधिकार आयोग ने हरियाणा के बास्केटबॉल कोर्ट में किशोर की मौत पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी
Modified Date: February 22, 2026 / 06:49 pm IST
Published Date: February 22, 2026 6:49 pm IST

चंडीगढ़, 22 फरवरी (भाषा) हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने रोहतक की खेल नर्सरी में हुई उस घटना का गंभीर संज्ञान लिया है, जिसमें पिछले साल नवंबर में बास्केटबॉल का खंभा गिरने से एक किशोर खिलाड़ी की मौत हो गई थी।

आयोग ने अपने हालिया आदेश में कहा कि यह घटना प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन उजागर करती है, खासतौर पर यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन, सुरक्षा और गरिमा के अधिकार का हनन है।

आयोग के अध्यक्ष ने हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव और चंडीगढ़ के खेल विभाग को एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया।

पिछले साल नवंबर में रोहतक जिले के लखन माजरा में अभ्यास के दौरान बास्केटबॉल हूप का लोहे का खंभा गिरने से राष्ट्रीय स्तर के बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी की मौत हो गई थी।

रोहतक के उपायुक्त ने आयोग के 18 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुसार एक रिपोर्ट पेश की। हालांकि, आयोग ने अपने 11 फरवरी के आदेश में कहा कि रिपोर्ट में घटना के कारण, सुरक्षा मानकों के पालन या पीड़ित परिवार को मुआवजे के प्रावधान के संबंध में कोई ठोस विवरण नहीं दिया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें केवल संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) पोर्टल से बास्केटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए 17,80,294 रुपये की मंजूरी का जिक्र है।

पिछले साल 26 नवंबर को एक जांच समिति का गठन किए जाने के बावजूद विस्तृत रिपोर्ट अभी तक पेश नहीं की गई है।

इसके अलावा, खेल उपकरणों और बुनियादी ढांचे के सुरक्षा निरीक्षणों के संबंध में कोई स्पष्ट तंत्र या मुआवजे के लिए कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मौजूद नहीं प्रतीत होती है।

एचएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने कहा कि हरियाणा खेल उत्कृष्टता में लगातार अग्रणी रहा है और उसने खेल संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास में पर्याप्त सार्वजनिक धन का निवेश किया है।

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में राज्य का यह दायित्व है कि वह सार्वजनिक संसाधनों से निर्मित सुविधाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करे।

न्यायमूर्ति बत्रा ने कहा कि इस संबंध में किसी भी तरह की चूक न केवल खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य को विफल करती है, बल्कि युवा खिलाड़ियों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।

आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि अगर बास्केटबॉल का खंभा जंग लगा हुआ और असुरक्षित था तथा बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद अधिकारियों ने इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो यह घोर लापरवाही मानी जाएगी।

उसने कहा कि यह राज्य के संवैधानिक दायित्व का उल्लंघन है।

न्यायमूर्ति बत्रा ने कई निर्देश और सुझाव जारी किए। आयोग के मुताबिक, हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव और चंडीगढ़ के खेल विभाग को एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है।

आयोग ने बताया कि समिति घटना के सटीक कारण का पता लगाएगी और संबंधित अधिकारियों, इंजीनियरों या ठेकेदारों की जवाबदेही तय करेगी।

उसने कहा कि समिति इस बात की जांच करेगी कि अनुमोदित डिजाइन, गुणवत्ता मानक और रखरखाव प्रोटोकॉल का विधिवत पालन किया गया था या नहीं।

आयोग के अनुसार, संरचनात्मक स्थिरता और सुरक्षा अनुपालन के संबंध में सभी खेल नर्सरी और सरकारी खेल सुविधाओं का राज्यव्यापी ऑडिट किया जाएगा।

उसने कहा कि नियमित निरीक्षण, तृतीय-पक्ष संरचनात्मक प्रमाणीकरण और व्यवस्थित रखरखाव के लिए एक समान तंत्र की सिफारिश की जाएगी।

आयोग ने कहा कि क्षति की गंभीरता और मृतक खिलाड़ी की भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए शोक संतप्त परिवार को उचित मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा।

उसने कहा कि राज्य द्वारा संचालित या राज्य द्वारा वित्त पोषित खेल सुविधाओं में मौत या गंभीर चोट के मामलों में तत्काल अंतरिम राहत एवं मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए एक संरचित और समयबद्ध मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी।

आयोग के मुताबिक, समिति की कमान भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी संभालेंगे, जबकि खेल एवं युवा मामलों के महानिदेशक, एक वरिष्ठ संरचनात्मक अभियंता और एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी/अर्जुन पुरस्कार विजेता इसमें सदस्य के रूप में शामिल होंगे।

इस मामले में अगली सुनवाई 19 मई को होगी।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश


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