बांग्लादेश लौटना चाहती हूं, जब भी बुलाया जाएगा मैं कोलकाता पहुंच जाऊंगी: तसलीमा
बांग्लादेश लौटना चाहती हूं, जब भी बुलाया जाएगा मैं कोलकाता पहुंच जाऊंगी: तसलीमा
कोलकाता, पांच अगस्त (भाषा) बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन बुधवार को छह दिन की यात्रा के बाद कोलकाता से रवाना हो गईं, लेकिन जाते-जाते उन्होंने इतना जरूर कहा कि जब भी यह शहर (कोलकाता) उन्हें बुलाएगा, वह यहां पहुंच जाएंगी।
रवानगी से पहले हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में नसरीन ने बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई, लेकिन कहा कि फिलहाल वह भारत में ही रहेंगी क्योंकि ढाका ने न तो उनके पासपोर्ट का नवीनीकरण किया है और न ही उनके स्वीडिश पासपोर्ट पर उन्हें वीजा दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘बेशक मैं लौटना चाहती हूं। मैं 32 साल से निर्वासन में हूं। लेकिन मुझे बांग्लादेश वापस जाने की इजाजत नहीं है। ऐसा नहीं है कि मैं लौटना नहीं चाहती।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं हुआ है। इसलिए, फिलहाल मैं भारत में ही रहूंगी।’’
लगभग दो दशक बाद 31 जुलाई को कोलकाता पहुंचीं नसरीन ने कहा कि वह ‘सुंदर यादों’ के साथ शहर से जा रही हैं और आम लोगों से मिले प्यार से वह बहुत भावुक हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पास बहुत अच्छी यादें हैं। आम लोगों के प्यार ने मेरी आंखों में आंसू ला दिए।’’ उन्होंने कहा कि कोलकाता हमेशा से उनके दिल के करीब रहा है।
उन्होंने संकेत दिया कि वह अक्टूबर या अगले साल जनवरी में शहर लौट सकती हैं। नसरीन ने कहा, ‘‘जब भी कोलकाता मुझे बुलाएगा, मैं आऊंगी।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या वह दुर्गा पूजा के दौरान शहर आएंगी, नसरीन ने कहा कि उस समय उनके शहर में रहने की संभावना कम है क्योंकि उनके विदेश में रहने की उम्मीद है। लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि वह कोलकाता पुस्तक मेले के लिए वह लौटेंगी।
उनकी यह यात्रा उस घटना के 19 साल बाद हुई है जब उन्हें अपनी लेखनी को लेकर हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। वर्ष 2007 के बाद शहर में यह उनकी पहली यात्रा थी।
एक दिन पहले, नसरीन ने कहा था कि बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका लौटने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना के सत्ता से बेदखल होने की दूसरी बरसी से पहले अवामी लीग पर से प्रतिबंध हटाने की भी मांग की।
भाजपा ने नसरीन की वापसी को एक प्रतीकात्मक सुधार के तौर पर पेश किया है। पार्टी का कहना है कि धार्मिक दबाव के आगे अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा करने में लगातार विफल रहीं वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस की सरकारों की नाकामी को इससे सुधारा गया है।
वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस का हमेशा से यही कहना रहा है कि वर्ष 2007 में नसरीन को कोलकाता छोड़ने के लिए कहने का फैसला पूरी तरह से कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया था, क्योंकि शहर के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया था।
भाषा संतोष नरेश
नरेश

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