‘सुपर’ अल नीनो को लेकर 180 से अधिक वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

‘सुपर’ अल नीनो को लेकर 180 से अधिक वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

‘सुपर’ अल नीनो को लेकर 180 से अधिक वैज्ञानिकों ने जताई चिंता
Modified Date: September 19, 2026 / 10:40 pm IST
Published Date: September 19, 2026 10:40 pm IST

नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) देश के 180 से अधिक वैज्ञानिकों और पारिस्थितिकी विशेषज्ञों ने साथी शोधकर्ताओं और क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों से आगामी ‘‘सुपर’’ अल नीनो घटना के लिए तैयार रहने की अपील पर हस्ताक्षर किए हैं। इस घटना का देश की प्राकृतिक प्रणालियों पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

अल नीनो की पहचान उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से होती है।

प्रशांत महासागर में तापमान लगातार 0.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा से ऊपर बढ़ा है और अगस्त में यह 2.6 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच गया। अनुमानों में चार डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा के अंतर की आशंका जताई गई है, जो पिछले 1,000 वर्षों में सबसे ज़्यादा है।

हस्ताक्षर करने वालों ने अपनी अपील में कहा, ‘‘हम साथी पारिस्थितिकी विशेषज्ञों से आह्वान करते हैं कि वे अपने शोध और निगरानी प्रयासों को मजबूत और विस्तारित करें, ताकि चरम जलवायु घटनाओं के प्राकृतिक दुनिया और उससे जुड़े सामाजिक तंत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।’’

इस महीने की शुरुआत में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा था कि वर्तमान अल नीनो की स्थिति आने वाले महीनों में और मजबूत होकर ‘‘बड़ी घटना’’ का रूप ले सकती है तथा इसके फरवरी 2027 तक जारी रहने की संभावना है।

हस्ताक्षरकर्ताओं के अनुसार, इतनी तीव्रता वाली अल नीनो घटना का भारत, उसकी आबादी और पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

इसके संभावित प्रभावों में बड़े पैमाने पर प्रवालों का सफेद पड़ना और उनका खत्म होना, जंगल में आग की घटनाओं में वृद्धि तथा बड़े वर्षावन वृक्षों का नष्ट होना शामिल हैं।

सूखे और भीषण गर्मी की स्थिति बनने की भी बहुत ज़्यादा संभावना है, जो भारत के किसानों, मछुआरों और चरवाहों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप


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