आईएलपी से नगा पहचान की रक्षा और विकास को बढ़ावा मिलना चाहिए: मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो
आईएलपी से नगा पहचान की रक्षा और विकास को बढ़ावा मिलना चाहिए: मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो
दीमापुर (नगालैंड), 29 अगस्त (भाषा) नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने शनिवार को कहा कि ‘‘इनर लाइन परमिट’’ (आईएलपी) केवल एक नियामक तंत्र बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे राज्य की पहचान की रक्षा करने के साथ-साथ प्रगति और समृद्धि का प्रभावी माध्यम होना चाहिए।
यहां टाउन हॉल में बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन (बीईएफआर) अधिनियम, 1873 पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए रियो ने कहा कि लक्ष्य एक प्रभावी और मानवीय ‘‘इनर लाइन परमिट’’ नीति के जरिए संतुलन बनाना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस नीति से राज्य की पहचान, जमीन, संस्कृति व मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और वैध आर्थिक गतिविधियों, विकास व अवसरों को बढ़ावा मिलना चाहिए।
रियो ने कहा, ‘हमें बीईएफआर 1873 का इस्तेमाल ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए करना होगा, जो भारतीय नागरिकों, मूल निवासी नगाओं और आर्थिक विकास के लिए आपसी हितों की रक्षा कर सके।’
उन्होंने कहा कि नगालैंड को खुद को अलग-थलग करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि एक-दूसरे के सहयोग के रास्ते तलाशने चाहिए और बेहतर व्यवस्थाओं को अपनाना चाहिए।
रियो ने कहा कि दीमापुर, चुमौकेदिमा और निउलैंड में आईएलपी लागू करने के फैसले को कुछ लोगों ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और अदालत ने इन तीनों जिलों में परमिट व्यवस्था लागू करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा।
उन्होंने इस फैसले को ‘नगाओं की बड़ी जीत’ बताया और कहा कि इससे संविधान के अनुच्छेद 371ए के महत्व को उजागर किया गया है।
अधिनियम का जिक्र करते हुए रियो ने कहा कि इसमें स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि बाहरी लोग अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते।
उन्होंने कहा, ‘हमें इस अधिनियम का समझदारी से इस्तेमाल करना होगा, नहीं तो अगर हम इसका गलत इस्तेमाल करेंगे, दुरुपयोग करेंगे या दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे तो इससे हमें ही नुकसान होगा।’
आईएलपी एक आधिकारिक अनुमति पत्र है, जिसकी जरूरत भारत के कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में प्रवेश करने के लिए पड़ती है। यह व्यवस्था बीईएफआर 1873 के तहत बनाई गई थी।
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश

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