ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के प्रभाव का आकलन किया जा रहा : केरल के भावी मुख्यमंत्री सतीशन
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के प्रभाव का आकलन किया जा रहा : केरल के भावी मुख्यमंत्री सतीशन
तिरुवनंतपुरम, 15 मई (भाषा) केरल के भावी मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने शुक्रवार को कहा कि वह अधिकारियों के साथ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का आम जनता पर पड़ने वाले प्रभाव को कैसे कम किया जाए।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र सरकार द्वारा की गई इस बढ़ोतरी को जनता के साथ ‘घोर अन्याय’ करार देते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।
सतीशन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘हम पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर चर्चा कर रहे हैं और जनता पर इसके पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कर रहे हैं, जिसके बाद हम इस पर कोई निर्णय लेंगे।’
विजयन ने एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार आम लोगों को कोई राहत देने के बजाय उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रही है, जो पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को अपने इस कथित ‘अन्यायपूर्ण फैसले को तुरंत वापस लेना चाहिए जो जनता को लूटकर कॉरपोरेट्स की रक्षा करता है।’
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरी थीं, तब उसका लाभ जनता को नहीं दिया गया और अब, तेल कंपनियों को हुए नुकसान की भरपाई की आड़ में पेट्रोल और डीजल के दाम तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ईंधन खुदरा विक्रेताओं के बढ़ते नुकसान के बीच शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। पिछले चार से अधिक वर्षों में दरों में यह पहली बढ़ोतरी है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य (विजयन) ने कहा कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब केंद्र सरकार की कथित गलत नीतियों के कारण रसोई गैस की कमी और महंगाई से लोगों का जीवन पहले से ही बेहाल है।
उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे समय में जब सही शासन और प्रभावी हस्तक्षेप के माध्यम से लोगों की मदद की जानी चाहिए थी, तब इस तरह के फैसलों को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।
विजयन ने रेखांकित किया कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएं और परिवहन लागत फिर से आसमान छूने लगेगी, जिससे श्रमिकों, किसानों और मध्यम वर्गीय परिवारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
भाषा सुमित मनीषा
मनीषा

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