Naxal Commander Devji: टॉप नक्सली कमांडर की बदली जिंदगी, कभी सिर पर था 1 करोड़ का इनाम, अब 62 साल की उम्र में दी 12वीं की परीक्षा

Naxal Commander Devji: टॉप नक्सली कमांडर की बदली जिंदगी, कभी सिर पर था 1 करोड़ का इनाम, अब 62 साल की उम्र में दी 12वीं की परीक्षा

Naxal Commander Devji: टॉप नक्सली कमांडर की बदली जिंदगी, कभी सिर पर था 1 करोड़ का इनाम, अब 62 साल की उम्र में दी 12वीं की परीक्षा

Naxal Commander Devji | Photo Credit: AI

Modified Date: May 15, 2026 / 03:22 pm IST
Published Date: May 15, 2026 3:11 pm IST
HIGHLIGHTS
  • सुरक्षा बलों और सरकार की योजनाओं से नक्सलवाद लगभग खत्म
  • टॉप नक्सली कमांडर देवजी ने दी परीक्षा
  • कभी सिर पर था 1 करोड़ का इनाम

नई दिल्ली: Naxal Commander Devji देश में लाल आतंक पूरी तरह से खत्म हो गई है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की योजनाओं के चलते बड़ी संख्या में माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। अब कई पूर्व नक्सली हथियार छोड़कर सामान्य जिंदगी की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार की पुनर्वास नीतियों के तहत उन्हें रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन के अवसर दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में तेलंगाना के टॉप नक्सली कमांडर अब मुख्यधारा में लौट चुके हैं और अब अपनी जीवन को नई दिशा देना शुरु कर दिया है। बुधवार को उन्होंने इंटरमीडिएट पब्लिक एडवांस्ड सप्लीमेंट्री परीक्षा दी।

Naxal Commander DevJi Kaun Hai 62 साल के देवजी ने जगित्याल जिले के कोरुतला कस्बे के मास्ट्रो जूनियर कॉलेज में सेकेंड ईयर का तेलुगु एग्जाम दिया। यह एग्जाम तेलंगाना बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन 12 से 20 मई तक राज्य भर में आयोजित किए जा रहे इंटरमीडिएट सप्लीमेंट्री एग्जाम्स का हिस्सा है। माओवादी कमांडर थिप्पिरी तिरुपति उर्फ ​​देवजी ने इस साल फरवरी में हथियार छोड़ हाथ में कमल थामा है। जिसे उनके गलत फैसले ने अधूरा छोड़ दिया था। कभी एक ‘आतंकवादी’ माने जाने वाले और जिनके सिर पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था, अब वे भारतीय राज्य के संरक्षण में एक डिग्री, प्रायश्चित और जीवन में एक दूसरे मौके की तलाश में हैं। देवजी कानून की पढ़ाई करना चाहते हैं और गरीबों को कानूनी सहायता देना चाहते हैं।

सशस्त्र विद्रोह में शामिल होने के लिए छोड़ा था कॉलेज

देवजी ने बताया कि 1984 में, उन्होंने भारतीय राज्य के खिलाफ एक सशस्त्र विद्रोह में शामिल होने के लिए कॉलेज छोड़ दिया था। अब, 62 साल की उम्र में, पूर्व माओवादी नेता देवजी तेलंगाना के एक परीक्षा हॉल में उस एक पेपर को पूरा करने के लिए दाखिल हुए, जिसे उनके गलत फैसले ने अधूरा छोड़ दिया था। कभी एक ‘आतंकवादी’ माने जाने वाले और जिनके सिर पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था, अब वे भारतीय राज्य के संरक्षण में एक डिग्री, प्रायश्चित और जीवन में एक दूसरे मौके की तलाश में हैं। देवजी कानून की पढ़ाई करना चाहते हैं और गरीबों को कानूनी सहायता देना चाहते हैं।

फरवरी में किया था सरेंडर

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, देवजी मोओवादी संगठन का सबसे सक्रीय कमांडर था। वे कई राज्यों में माओवादी अभियानों के प्रमुख रणनीतिकार रहे। उनपर करीब एक करोड़ का इनाम घोषित था। करीब 44 सालों तक अंडरग्राउंड रहने के बाद फरवरी 2026 में तेलंगाना पुलिस के सामने उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था।

Who is Dev Ji: कौन है देवा जी जिसने हाल ही में सरेंडर किया ?

देवजी, जिसका वास्तविक नाम थिप्पिरी तिरुपति है, देश के सबसे खतरनाक और वरिष्ठ माओवादी नेताओं में गिना जाता रहा है। लगभग 60 वर्षीय देवजी मूल रूप से तेलंगाना (पूर्व आंध्र प्रदेश) के करीमनगर जिले का निवासी है और संगठन में महासचिव जैसे सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाला तीसरा लगातार तेलुगु नेता माना जाता है। इंटरमीडिएट शिक्षा के दौरान वह रैडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ा और यहीं से भूमिगत माओवादी गतिविधियों में शामिल हो गया। तेज रणनीतिक सोच और संगठनात्मक कौशल के कारण वह जल्द ही माओवादियों की मिलिट्री इंटेलिजेंस विंग का प्रमुख बना और बाद में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का इंचार्ज तथा पोलित ब्यूरो सदस्य के रूप में शीर्ष नेतृत्व में शामिल हुआ। मई 2025 में बसवराजु के एनकाउंटर के बाद सितंबर 2025 में उसे CPI (माओवादी) का महासचिव नियुक्त किया गया था।

कई बड़े एंबुश और आईईडी हमलों की रणनीति से जुड़ा रह चुका है देव जी

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार देवजी उर्फ देवअन्ना, चेतन, संजीव और सुधर्शन जैसे कई नामों से सक्रिय रहा और गोवा, केरल व बंगाल तक माओवादी नेटवर्क विस्तार में उसकी भूमिका बताई जाती है। वह छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी कांड सहित कई बड़े एंबुश और आईईडी हमलों की रणनीति से जुड़ा रहा है और इस कारण उसे देश के सबसे खतरनाक माओवादी नेताओं में माना जाता था। विभिन्न राज्यों में उस पर 1 से 2 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था।

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