Dhar Bhojshala Maa Saraswati: धार भोजशाला पर बड़ा फैसला, कोर्ट बोला-यह मां सरस्वती का मंदिर, अब लंदन से लौट सकती इस देवी की प्रतिमा!
Dhar Bhojshala Maa Saraswati: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में शुक्रवार को हाई कोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है।

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- भोजशाला को मंदिर माना गया
- हिंदू पक्ष को पूजा अनुमति
- ASI सर्वे में अहम सबूत
Dhar Bhojshala Maa Saraswati: धार: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में शुक्रवार को हाई कोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भोजशाला परिसर माँ सरस्वती का मंदिर है और हिंदू पक्ष को यहां पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी जाती है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है और बीजेपी विधायक रामेश्नेवर शर्मा इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सनातन आस्था की जीत बताया है।
Dhar Bhojshala Verdict: कोर्ट ने ASI सर्वे रिपोर्ट का उल्लेख किया
कोर्ट ने अपने फैसले में ASI सर्वे रिपोर्ट का भी विस्तार से उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि सर्वे के दौरान परिसर की दीवारों पर देवी-देवताओं के स्वरूप और धार्मिक आकृतियां स्पष्ट रूप से दिखाई दीं। इसके अलावा भोजशाला के खंभों पर की गई नक्काशी को राजा भोज के काल का बताया गया, जो मंदिर वास्तुकला और हिंदू संस्कृति की पहचान मानी गई। कोर्ट ने यह भी माना कि परिसर में मौजूद हवन कुंड मंदिर होने का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है।
Bhojshala Temple Controversy: माँ वाग्देवी की प्रतिमा का भी जिक्र किया गया है
ASI सर्वे के दौरान परिसर से कई खंडित देवी-देवताओं की मूर्तियां भी मिली थीं, जिन्हें अदालत ने अहम साक्ष्य माना। वहीं, फैसले में माँ वाग्देवी की प्रतिमा का भी जिक्र किया गया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बात पर विचार करने को कहा है कि लंदन म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा को वापस भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
भोजशाला सुनवाई के प्रमुख बिंदु
- 12 मई 2026, मंगलवार को इंदौर में भोजशाला प्रकरण की सुनवाई उच्च न्यायालय में पूरी हुई।
- वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा उच्च न्यायालय इंदौर में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर हिंदू समाज के पूर्ण आधिपत्य के लिए याचिका क्रमांक 10497/ 2022 लगाई गई थी
- इसी प्रकरण में आगे चलकर वर्ष 2024 में भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया गया
- वर्ष 2026 में 23 जनवरी,शुक्रवार वसंत पंचमी के अवसर पर दिनभर अबाधित पूजा अर्चना हेतु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेश इसी प्रकरण में दिया गया था
- भोजशाला प्रकरण की सुनवाई 6 अप्रैल 2026 से हाईकोर्ट में निरंतर जारी थी
- अप्रैल 2026 से 9 अप्रैल 2026 तक हिंदू पक्ष की ओर से तर्क रखे गए
- इसके पश्चात मुस्लिम पक्ष एवं अन्य पक्षों द्वारा तर्क रखे गए
- इस मुख्य याचिका के साथ ही चार अन्य याचिका और एक अपील भी क्लब थी जिनकी भी सुनवाई पूरी हो गई हैं
हिंदूओं की याचिका की प्रमुख मांगे
- हिंदू समाज को भोजशाला में अनुच्छेद 25 के अनुसार पूजा का अधिकार मिले तथा मुस्लिम समाज को भोजशाला परिसर में किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जावे।
- केंद्र सरकार को आदेशित किया जावे कि भोजशाला हेतु एक ट्रस्ट बनाया जावे जिससे कि भोजशाला का संचालन एवं प्रबंध किया जा सके।
- इसी ट्रस्ट को यह आदेशित किया जावे कि माँ सरस्वती की प्रतिमा की पूजा एवं अर्चना निर्बाध रूप से कराई जावे।
- भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज द्वारा की जा रही नमाज बंद हो।
- भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त किया जावे एवं हिंदू समाज को नियमित प्रतिदिन पूजा करने का अधिकार मिले।
- ब्रिटिश म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्रतिमा को पुनः वापस लाया जावे एवं भोजशाला धार में स्थापित किया जावे।
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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः
उत्तर: भोजशाला को मंदिर माना गया
लेखक के बारे में
पत्रकारिता और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक हूँ। मीडिया क्षेत्र में 3 वर्षों का विविध अनुभव प्राप्त है, जहां मैंने अलग-अलग मीडिया हाउस में एंकरिंग, वॉइस ओवर और कंटेन्ट राइटिंग जैसे कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दिया। IBC24 में मैं अभी Trainee-Digital Marketing के रूप में कार्यरत हूँ।
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