दिल्ली में 2019 में कुर्सियां, कूलर, गद्दा आदि चोरी करने का मामला खत्म, आरोपी बरी
दिल्ली में 2019 में कुर्सियां, कूलर, गद्दा आदि चोरी करने का मामला खत्म, आरोपी बरी
नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2019 में लुटियंस क्षेत्र में एक सांसद को आवंटित सरकारी आवास से कुर्सियां, कूलर और गद्दा समेत अन्य सामान चोरी होने के मामले का निपटारा करते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि चोरी किया गया सामान सरकार का था।
न्यायिक मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज संसद भवन थाने में दर्ज मामले की सुनवाई कर रहे थे।
मामले में बिहार के खगड़िया निवासी नीरज कुमार सिंह आरोपी था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने 21 जुलाई, 2019 को तड़के डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित बंगले में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करके कूलर, कंप्यूटर, मॉनिटर, पर्दे, रसोई के बर्तन, गद्दे और प्लास्टिक की कुर्सियों समेत विभिन्न घरेलू सामान चोरी किए।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि चोरी किया गया कूलर, तीन कुर्सियां और एक गद्दा बाद में आरोपी के पास से बरामद किया गया।
अदालत ने हालांकि, 24 अगस्त के अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला उस समय कमजोर पड़ गया, जब मुख्य प्रत्यक्षदर्शी और शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे ‘‘इस मामले के बारे में कुछ भी याद नहीं है।’’
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के दूसरे गवाह ने अपने बयान में बताया कि सिंह तत्कालीन सांसद के यहां चालक के रूप में काम करता था और घटना वाले दिन बंगले में शराब पी रहा था।
अदालत ने कहा कि मुख्य गवाह ने बताया था कि उसे किसी अन्य व्यक्ति से जानकारी मिली थी कि सिंह ने चोरी की है।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के अपने बयान से मुकर जाने के बाद दूसरे व्यक्ति की गवाही का कोई मूल्य नहीं रह गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘घटना का कोई अन्य गवाह नहीं है। इसलिए अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी ने चोरी करने के लिए छिपकर घर में प्रवेश किया या घर में सेंध लगाई थी।’’
अदालत ने बरामद सामान के संबंध में कहा कि यह पुष्टि करने के लिए कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था कि ये सामान चोरी के थे।
अदालत ने कहा कि केवल सामान चोरी करने के संबंध में आरोपी के खुलासा करने वाले बयान के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष यह भी साबित करने में विफल रहा कि आरोपी के कब्जे से कथित तौर पर बरामद संपत्ति (कुर्सियां, गद्दा और कूलर) केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की थी।’’
अदालत ने कहा कि विभाग के किसी भी व्यक्ति को बरामद कूलर या कुर्सियों की तस्वीरें नहीं दिखाई गईं, ताकि यह पुष्टि हो सके कि वे वास्तव में सरकारी संपत्ति थीं।
अदालत ने कहा, ‘‘इस तरह की पहचान के अभाव में यह साबित नहीं माना जा सकता कि बरामद चीजें चोरी की गई थी।’’
अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहने के कारण आरोपी को बरी कर दिया।
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष

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