Corruption in Gwalior: बिना पैसों के नहीं हो रहा सरकारी काम! इस विभाग में सबसे ज्यादा रिश्वतखोर कर्मचारी, अब तक पकड़े गए 37 लोग

बिना पैसों के नहीं हो रहा सरकारी काम! इस विभाग में सबसे ज्यादा रिश्वतखोर कर्मचारी, Corruption in Gwalior: 37 Employees Arrested for Taking Bribe

Corruption in Gwalior: बिना पैसों के नहीं हो रहा सरकारी काम! इस विभाग में सबसे ज्यादा रिश्वतखोर कर्मचारी, अब तक पकड़े गए 37 लोग
Modified Date: August 27, 2026 / 07:20 pm IST
Published Date: August 27, 2026 7:20 pm IST

ग्वालियर। Corruption in Gwalior: सरकारी दफ्तरों में बिना पैसे काम कराने की शिकायतों के बीच ग्वालियर में रिश्वतखोरी का मामला गंभीर होता जा रहा है। लोकायुक्त पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक 1 जनवरी 2025 से अगस्त 2026 तक जिले में नौ सरकारी विभागों के 37 अधिकारी-कर्मचारी रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 19 आरोपी राजस्व विभाग के हैं, जबकि नगर निगम के सात अधिकारी-कर्मचारी ट्रैप कार्रवाई में पकड़े गए। लोकायुक्त की कार्रवाई में सामने आया है कि सीमांकन, नामांतरण और नाम संशोधन जैसे आम कामों के लिए भी लोगों से रिश्वत की मांग की गई। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक पैसे नहीं देने पर उनकी फाइलें लंबित रखी गईं। परेशान होकर लोगों ने लोकायुक्त में शिकायत की, जिसके बाद सत्यापन और ट्रैप कार्रवाई के जरिए आरोपियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया।

राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा घूसखोर (Corruption in Gwalior)

लोकायुक्त के आंकड़ों के अनुसार 19 महीने में राजस्व विभाग के 19 अधिकारी-कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए। इनमें पटवारी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। नगर निगम दूसरे स्थान पर रहा, जहां सात अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई हुई। पंचायत विभाग के तीन, पुलिस और कृषि विभाग के दो-दो तथा वन विभाग, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और नापतौल विभाग के एक-एक अधिकारी-कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए।

हाल की कार्रवाइयों में सामने आए मामले

1 जून 2026 को लोकायुक्त ने पेट्रोल पंप संचालक से 27,500 रुपये की रिश्वत लेते नापतौल निरीक्षक सौरभ शर्मा को पकड़ा। इसके बाद 19 जून को हल्का पटवारी रेखा को 15 हजार रुपये लेते पकड़ा गया। सिरसौद निवासी मंशाराम ने शिकायत की थी कि बहन की जमीन के सीमांकन और पत्नी सावित्रीबाई के नाम नामांतरण के लिए रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत के मुताबिक पहली किश्त के रूप में 3,500 रुपये पहले ही लिए जा चुके थे। 30 जुलाई 2026 को ग्वालियर नगर निगम के कार्यपालन यंत्री सुशील कटारे को छह हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। खास बात यह रही कि आरोपी अगले ही दिन सेवानिवृत्त होने वाला था।

मालनपुर में पकड़े गए पटवारी

20 मई 2026 को मालनपुर में पटवारी हिमांशु तोमर को किसान से सीमांकन के बदले आठ हजार रुपये मांगने और छह हजार रुपये की पहली किश्त लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। वहीं 8 जनवरी 2025 को राममोहन गुर्जर की शिकायत पर पटवारी सुनील शर्मा को दूसरी किश्त लेते पकड़ा गया। सुनील शर्मा पर आठ हजार रुपये रिश्वत मांगने और छह हजार रुपये पहले लेने का आरोप था। 20 फरवरी 2025 को पिछोर में पटवारी दिग्विजय सिंह ने किसान शंकर लोधी से नामांतरण के लिए 25 हजार रुपये मांगे थे। दो हजार रुपये एडवांस लेने के बाद बाकी 23 हजार रुपये लेते हुए उसे ट्रैप किया गया। 6 अक्टूबर 2025 को पटवारी अमन शर्मा को किसान संजय सिंह से नाम संशोधन के लिए मांगी गई 42 हजार रुपये की रिश्वत में से 14 हजार रुपये लेते पकड़ा गया।

जांच के बावजूद नहीं थम रहा खेल

बताया जा रहा है कि राजस्व और नगर निगम से जुड़े कई अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ पहले से लोकायुक्त और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) में जांच चल रही है। आरोपों के घेरे में पूर्व महापौर से लेकर पूर्व कमिश्नर तक के नाम सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आना सरकारी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कुछ मामलों में महिला कर्मचारी भी लोकायुक्त की कार्रवाई में पकड़ी गई हैं। लोकायुक्त पुलिस का कहना है कि रिश्वतखोरों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी काम के बदले रिश्वत मांगता है तो इसकी शिकायत सीधे लोकायुक्त से करें।

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