उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से लंबित मामलों की संख्या कम होगी : कानून मंत्री
उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से लंबित मामलों की संख्या कम होगी : कानून मंत्री
नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 38 करने से लंबित मामलों के अंबार को कम करने में मदद मिलेगी तथा लोगों को शीघ्र न्याय मिल सकेगा।
विधि एवं न्याय मंत्री मेघवाल ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर उच्च सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के बढ़ते कार्यभार, न्यायिक विषयों की बदलती प्रकृति, संवैधानिक एवं कानूनी व्याख्या के उभरते नये सवालों को ध्यान में रखकर उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना समय की मांग और समयानुकूल सुधार भी है। उन्होंने कहा कि इसमें अधिक संवैधानिक पीठों के गठन की आवश्कता भी एक प्रमुख पहलू है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि सरकार इस समय यह विधेयक क्यों लायी तथा इसके लिए अध्यादेश क्यों जारी किया गया। उन्होंने कहा कि यदि बारीकी से विचार किया जाए तो उच्चतम न्यायालय में ढांचागत बदलाव को अपनाकर कम से कम एक स्थायी संवैधानिक पीठ की स्थापना के साथ-साथ दो या तीन विशिष्ट पीठ बनाने की जरूरत है।
कानून मंत्री ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने 11 मई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बताया था कि दैनिक आधार पर उच्चतम न्यायालय में दाखिल होने वाले मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रधान न्यायाधीश ने लिखा कि यदि साल में औसत आधार पर देखा जाए तो जितने मामले दाखिल किए जाते हैं और जितनों का निस्तारण होता है उनकी संख्या में दस हजार का अंतर रह जाता है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए अधिक न्यायाधीशों को नियुक्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संविधान पीठ के गठन से अन्य पीठों में काम कर रहे न्यायाधीशों की कमी हो जाती है।
उन्होंने कहा कि 28 जनवरी 1950 को जब देश में उच्चतम न्यायालय की शुरुआत हुई थी तो उसमें प्रधान न्यायाधीश को मिलाकर आठ न्यायाधीश थे तथा इस विधेयक के कानून बनने के बाद शीर्ष अदालत में प्रधान न्यायायाधीश को मिलाकर कुल 38 न्यायाधीश हो जाएंगे।
उच्चतम न्यायालय में अधिक महिलाओं को न्यायाधीश बनाने की कुछ सदस्यों की मांग पर कानून मंत्री ने कहा कि शीर्ष अदालत में पहले ही एक महिला न्यायाधीश थीं और अभी एक और की नियुक्ति हुई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही देश पहली बार एक महिला को प्रधान न्यायाधीश पद पर देखेगा।
उन्होंने कहा कि चार उच्च न्यायालयों में महिला मुख्य न्यायाधीश हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश, मेघालय, गुजरात शामिल है और पटना में इस पद पर रहीं महिला न्यायाधीश अभी सेवानिवृत्त हुई हैं।
कानून मंत्री ने न्यायिक आधारभूत ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि 795.53 करोड़ रूपये की लागत से उच्चतम न्यायालय भवन के विस्तार का काम सीपीडब्ल्यूडी द्वारा दो चरणों में किया जा रहा है। इसमें 28 अदालत कक्षों तथा न्यायाधीशों के 42 कक्षों के निर्माण के साथ ही, पार्किंग और वकीलों की सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 2014 में जहां देश में प्रति दस लाख की आबादी पर न्यायाधीशों की संख्या 16.11 थी, वहीं अब यह बढ़कर 22.33 हो गयी है।
मेघवाल ने कहा कि देश के कई हिस्सों से यह मांग उठती रही है कि वहां भी उच्चतम न्यायालय की न्याय पीठ खोली जानी चाहिए। किंतु उच्चतम न्यायालय इन प्रस्तावों पर सहमत नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस बारे में संसद की एक समिति और नीति आयोग की सिफारिश भी उच्चतम न्यायालय में भेजी गयी किंतु वह इस पर सहमत नहीं हुआ।
उन्होंने राष्ट्रीय न्यायिक आंकड़ा ग्रिड के 16 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय में 96,024 मामले, 25 उच्च न्यायालयों में 64.72 लाख मामले और अधीनस्थ न्यायालयों में 4.98 करोड़ मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वैकल्पिक विवाद निस्तारण माध्यमों से लंबित मामलों का निपटारा करने का प्रयास कर रही है।
कानून मंत्री के जवाब के बाद उच्च सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से लौटा दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।
भाषा
माधव अविनाश
अविनाश

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