स्वतंत्र पत्रकारिता को दंडित और सरकार के अनुरूप चलने वालों को पुरस्कृत किया जा रहा: खरगे

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स्वतंत्र पत्रकारिता को दंडित और सरकार के अनुरूप चलने वालों को पुरस्कृत किया जा रहा: खरगे

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  • Publish Date - May 3, 2026 / 12:27 PM IST,
    Updated On - May 3, 2026 / 12:27 PM IST

नयी दिल्ली, तीन मई (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रेस की स्वतंत्रता के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए रविवार को कहा कि उनका संदेश स्पष्ट है कि स्वतंत्र पत्रकारिता को दंडित किया जाएगा और सरकार के हिसाब से चलने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा।

खरगे ने आरोप लगाया कि मीडिया के एक वर्ग को सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान की बात दोहराने तक सीमित कर दिया गया है, जबकि सवाल पूछना जारी रखने वालों को ‘‘लगातार निशाना’’ बनाया जा रहा है।

खरगे ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत की स्थिति 2014 से लगातार गिरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ परिवार ने समाचार कक्षों को चुप कराने के लिए कानूनी ढांचों का ‘‘हथियार’’ के रूप में तेजी से इस्तेमाल किया है।

खरगे ने कहा कि देश को इस कठोर और निर्विवाद वास्तविकता का सामना करना होगा कि भाजपा के शासन में 2014 से विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत की स्थिति लगातार गिरकर 157वें स्थान पर पहुंच गई है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘सही अर्थ में स्वतंत्र प्रेस का काम सरकार की बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना या उसकी नाकामियों को छिपाना नहीं होता। उसका काम सत्ता से सवाल करना, सत्ता की पड़ताल करना और पद पर बैठे लोगों को जवाबदेह ठहराना है।’’

खरगे ने कहा कि मीडिया सत्ता और लोगों के बीच लोकतांत्रिक संतुलन को बनाए रखता है।

उन्होंने कहा, ‘‘पत्रकार सार्वजनिक सत्य के संरक्षक होते हैं। पंडित नेहरू ने कहा था, ‘प्रेस की स्वतंत्रता केवल एक नारा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक आवश्यक गुण है।’ मौजूदा शासन में यह आवश्यक गुण गंभीर रूप से कमजोर हुआ है।’’

खरगे ने कहा, ‘‘संघ परिवार ने समाचार कक्षों को चुप कराने के लिए कानूनी ढांचों को हथियार के रूप में तेजी से इस्तेमाल किया है। मानहानि कानूनों, राष्ट्रीय सुरक्षा प्रावधानों और व्यापक आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल न्याय के माध्यम के रूप में नहीं, बल्कि डराने-धमकाने के औजार के रूप में किया जा रहा है।’’

उन्होंने दावा किया कि 2014 से 2020 के बीच 135 से अधिक पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया, हिरासत में लिया गया या उनसे पूछताछ की गई। उन्होंने कहा कि 2014 से 2023 के बीच 36 पत्रकारों को जेल में डाला गया।

खरगे ने कहा कि कई पत्रकारों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) जैसे कठोर कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इस बीच, हिंसा और दंडमुक्ति का एक कहीं अधिक चिंताजनक चलन सामने आया है। भाजपा-शासित राज्यों में पत्रकारों की अपना काम करने के लिए हत्या की जा रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश में राघवेंद्र बाजपेयी, छत्तीसगढ़ में मुकेश चंद्राकर, उत्तराखंड में राजीव प्रताप सिंह और हरियाणा में धर्मेंद्र सिंह चौहान-ये सभी भ्रष्टाचार और जनहित से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। आज वे सत्ता के सामने सच बोलने की भयावह कीमत के कड़वे उदाहरण बनकर खड़े हैं।’’

खरगे ने दावा किया कि ‘‘भाजपा-आरएसएस सरकार’’ अपने मौजूदा नियंत्रण से संतुष्ट नहीं है और पूर्ण प्रभुत्व की चाह में अब सोशल मीडिया पर अपनी पकड़ और मजबूत करने की कोशिश कर रही है ताकि उसे भी चुप कराया जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा-आरएसएस का संदेश स्पष्ट है: स्वतंत्र पत्रकारिता को दंडित किया जाएगा और सरकार के अनुरूप चलने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा। मीडिया के एक वर्ग को सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान की बात दोहराने तक सीमित कर दिया गया है, जबकि सवाल पूछना जारी रखने वालों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।’’

खरगे ने कहा, ‘‘जब हम विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, तो यह सभी पक्षों के लिए गहन आत्ममंथन का समय है।’’

उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सत्ता में बैठे लोगों को दीर्घकाल से स्थापित लोकतांत्रिक मानकों को हमेशा बनाए रखना चाहिए।

खरगे ने कहा, ‘‘यदि इन सिद्धांतों से विचलन को लंबे समय तक जारी रहने दिया गया, तो उसके सामान्य और स्वीकार्य बन जाने का खतरा रहता है। इससे लोकतांत्रिक मानदंडों, मूल्यों, संस्थाओं और लोगों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।’’

खरगे ने कहा कि इसलिए मौजूदा सरकार को उच्चतम संभव मानकों को बरकरार रखना चाहिए।

भाषा सिम्मी नेत्रपाल

नेत्रपाल