भारत ने वैश्विक चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए व्यावहारिक रास्ते खोजने का आह्वान किया

भारत ने वैश्विक चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए व्यावहारिक रास्ते खोजने का आह्वान किया

भारत ने वैश्विक चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए व्यावहारिक रास्ते खोजने का आह्वान किया
Modified Date: May 14, 2026 / 12:31 pm IST
Published Date: May 14, 2026 12:31 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) भारत ने बृहस्पतिवार को ब्रिक्स देशों से वैश्विक संघर्षों, आर्थिक अस्थिरता और व्यापारिक व्यवधानों के प्रभाव से बेहतर तरीके से निपटने के लिए ‘‘व्यावहारिक रास्ते’’ खोजने का आग्रह किया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यह टिप्पणी यहां आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में की, जिसमें ईरान, रूस, ब्राजील और समूह के कई अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया।

यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया संकट विशेष रूप से अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध से ऊर्जा आपूर्ति में उत्पन्न भारी व्यवधानों के कारण वैश्विक आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

नयी दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा, ‘‘हम ऐसे समय में मुलाकात कर रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जारी संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितताएं और व्यापार, प्रौद्योगिकी तथा जलवायु से जुड़ी चुनौतियां वैश्विक परिदृश्य को आकार दे रही हैं।’’

जयशंकर ने कहा कि विशेष रूप से उभरते बाजारों और विकासशील देशों में यह अपेक्षा बढ़ी है कि ब्रिक्स वर्तमान चुनौतियों से निपटने में रचनात्मक और स्थिरता प्रदान करने वाली भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘इस पृष्ठभूमि में आज की हमारी चर्चा वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार करने तथा सहयोग को मजबूत करने के व्यावहारिक उपाय तलाशने का अवसर है।’’

विदेश मंत्री ने कहा कि विकास से जुड़े मुद्दे अब भी अहम हैं। उन्होंने कहा कि कई देश ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों के साथ-साथ वित्तीय संसाधनों तक पहुंच की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ब्रिक्स इन देशों को अधिक प्रभावी ढंग से जवाब देने में मदद कर सकता है। आर्थिक मजबूती भी बेहद महत्वपूर्ण है। भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला और विविध बाजार इसके आवश्यक घटक हैं। हमें दोनों पर ध्यान देना होगा।’’

जयशंकर ने कहा कि शांति और सुरक्षा वैश्विक व्यवस्था के लिए ‘‘अहम’’ बनी हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हाल के संघर्ष संवाद और कूटनीति के महत्व को और रेखांकित करते हैं। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग मजबूत करने में भी सभी की गहरी साझा रुचि है।’’

भाषा गोला वैभव

वैभव


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