भारत में 97 लाख टन समुद्री शैवाल का उत्पादन करने की क्षमता : सीएमएफआरआई

भारत में 97 लाख टन समुद्री शैवाल का उत्पादन करने की क्षमता : सीएमएफआरआई

भारत में 97 लाख टन समुद्री शैवाल का उत्पादन करने की क्षमता : सीएमएफआरआई
Modified Date: November 29, 2022 / 08:39 pm IST
Published Date: July 28, 2022 1:05 pm IST

कोच्चि (केरल), 28 जुलाई (भाषा) केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने कहा कि भारत में हर साल करीब 97 लाख टन समुद्री शैवाल का उत्पादन करने की क्षमता है और उसने समुद्री पौधों और शैवाल की खेती के लिए देश में 342 संभावित स्थानों की पहचान की है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से मान्यता प्राप्त सीएमएफआरआई ने भारत में समुद्री शैवाल की खेती बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि देश में वैश्विक समुद्री शैवाल के उत्पादन में प्रमुख योगदान देने की क्षमता है जो कि अरबों रुपये का कारोबार है। उसने कहा कि पिछले साल भारत ने समुद्री शैवाल का महज 34,000 टन उत्पादन किया था।

एक विज्ञप्ति के अनुसार, आईसीएआर-सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ए. गोपालकृष्णन ने कहा कि समुद्री पौधों की विभिन्न प्रजातियों और शैवाल का वैश्विक उत्पादन 2022 में अभी तक 3.5 करोड़ टन है, जिसकी कीमत करीब 16.5 अरब डॉलर है।

वह बुधवार को ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तौर पर यहां सीएमएफआरआई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

डॉ. गोपालकृष्णनन ने कहा कि सरकार ने समुद्री खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत 640 करोड़ रुपये का बजट तय किया है और 2025 तक इसका 11.2 लाख टन से अधिक का उत्पादन करने का लक्ष्य है।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा


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