भारत ने पवन ऊर्जा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की : प्रधानमंत्री मोदी

भारत ने पवन ऊर्जा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की : प्रधानमंत्री मोदी

भारत ने पवन ऊर्जा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की : प्रधानमंत्री मोदी
Modified Date: April 26, 2026 / 12:47 pm IST
Published Date: April 26, 2026 12:47 pm IST

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत ने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है और देश की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो गई है।

अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मोदी ने यह भी कहा कि देश को बिजली की बचत करनी चाहिए और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने हाल में पवन ऊर्जा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब भारत की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। पिछले एक साल में ही करीब छह गीगावाट नयी क्षमता जुड़ी है।’’

भारत के विकास के लिए सौर और पवन ऊर्जा को आवश्यक बताते हुए मोदी ने कहा, ‘‘यह सिर्फ पर्यावरण का सवाल नहीं है; यह हमारे भविष्य को सुरक्षित करने का सवाल है और इसमें हम सभी की भूमिका है।’’

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 22 अप्रैल को कहा कि भारत ने पवन ऊर्जा क्षमता संवर्धन में अपना अब तक का सबसे अच्छा वर्ष दर्ज किया है, जिसमें 2025-26 के दौरान ऐतिहासिक 6.1 गीगावाट क्षमता जोड़ी गई है।

भारत वर्तमान में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर है, जिसकी स्थापित क्षमता 56.1 गीगावाट से अधिक है और अतिरिक्त 28 गीगावाट परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

इस क्षेत्र की अपार अप्रयुक्त क्षमता पर जोर देते हुए जोशी ने बताया कि 150 मीटर हब की ऊंचाई पर भारत की पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 1,164 गीगावाट होने का अनुमान है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर प्रयासों से देश 2030 तक 100 गीगावाट और 2036 तक 156 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल कर लेगा, जिससे 2070 तक ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

‘नेट जीरो’ उत्सर्जन का मतलब है कि कोई देश जितना कार्बन उत्सर्जन करता है, उतना ही कार्बन खत्म करने की व्यवस्था भी करे। नेट जीरो का मतलब यह नहीं है कि कार्बन का उत्सर्जन शून्य हो जाएगा।

जोशी ने इस बात पर भी जोर दिया कि पवन ऊर्जा भारत की ऊर्जा प्रणाली को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, विशेष रूप से शाम और रात के दौरान इसके चरम उत्पादन के कारण।

भाषा गोला सुरभि

सुरभि


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