Mann Ki Baat 133rd Episode: पवन ऊर्जा से लेकर बांस के उद्योग तक, पीएम मोदी ने मन की बात के 133वें एपिसोड में किया इन बातों का जिक्र, आप भी जानें यहां

Mann Ki Baat 133rd Episode: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 133वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित किया।

Mann Ki Baat 133rd Episode: पवन ऊर्जा से लेकर बांस के उद्योग तक, पीएम मोदी ने मन की बात के 133वें एपिसोड में किया इन बातों का जिक्र, आप भी जानें यहां

Mann Ki Baat 133rd Episode/ image source: IBC24

Modified Date: April 26, 2026 / 01:33 pm IST
Published Date: April 26, 2026 1:30 pm IST
HIGHLIGHTS
  • पीएम मोदी ने मन की बात के 133वें एपिसोड हुआ प्रदर्शित।
  • पीएम मोदी ने पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा पर की चर्चा।
  • पीएम मोदी ने मन की बात में छत्तीसगढ़ का किया जिक्र।

Mann Ki Baat 133rd Episode: नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 133वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि, ‘मन की बात’ के एक और episode में आप सबसे जुड़कर खुशी हो रही है। इधर, बीच, चुनाव की भागदौड़ रही है, लेकिन आपके पत्रों और संदेशों के माध्यम से हमने देश और देशवासियों की उपलब्धियों पर एक-दूसरे से अपनी खुशियाँ साझा भी की हैं। इस बार ‘मन की बात’ की शुरुआत देश की एक ऐसी ही बहुत बड़ी उपलब्धि से करते हैं।

विज्ञान को हमेशा देश की प्रगति से जोड़कर देखा

साथियो, भारत ने विज्ञान को हमेशा देश की प्रगति से जोड़कर देखा है। इसी सोच के साथ हमारे वैज्ञानिक Civil Nuclear Programme को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके प्रयासों से यह कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण में अहम् योगदान दे रहा है। इससे हमारी industrial growth को, energy sector को, healthcare sector को बहुत लाभ हुआ है। खेती किसानी से लेकर आधुनिक innovators को भी भारत के Civil Nuclear Programme ने बहुत मदद की है। साथियो, कुछ ही दिन पहले, हमारे Nuclear Scientist ने एक और बड़ी उपलब्धि से भारत का गौरव बढ़ाया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में Fast Breeder Reactor ने Criticality हासिल कर ली है। (Mann Ki Baat 133rd Episode) दरअसल, Criticality वह stage है, जिसमें reactor पहली बार self-sustaining nuclear chain reaction में सफलता हासिल करता है। इस stage का मतलब है reactor का operation phase में पहुंचना। भारत की nuclear energy journey में यह एक ऐतिहासिक milestone है। और बड़ी बात ये भी कि परमाणु reactor पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है।

Mann Ki Baat 133rd Episode: साथियो, इसे Breeder Reactor क्यों कहते हैं? इसके पीछे भी एक वजह है। यह एक ऐसा system है, जो ऊर्जा के उत्पादन के साथ-साथ भविष्य के लिए नया ईंधन भी खुद ही तैयार करता है। साथियो, मुझे मार्च 2024 का वह समय भी याद है, जब मैं कलपक्कम में reactor की core loading का साक्षी बना था। मैं उन सभी को बधाई देता हूँ, जिन्होंने, भारत के परमाणु कार्यक्रम में अपना अमूल्य योगदान दिया है। देशवासियों का जीवन बेहतर और आसान बनाने के लिए उनका यह प्रयास बहुत ही सराहनीय है। इससे विकसित भारत के हमारे संकल्प को भी एक नई ऊर्जा मिलेगी।

मेरे प्यारे देशवासियो ‘मन की बात’ में आज मैं एक ऐसी शक्ति की बात करना चाहता हूँ, जो अदृश्य है, लेकिन, जिसके बिना हमारा जीवन एक पल भी ना चले। यही ताकत भारत को आगे बढ़ा रही है। यह हमारी पवन-शक्ति है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है –

‘वायुर्वा इति व्यष्टि:, वायुरवै समष्टि:।’

अर्थात् वायु सिर्फ एक तत्व नहीं है, यह जीवन की ऊर्जा है, यह समष्टि की शक्ति है।

साथियो, आज यही पवन-शक्ति भारत के विकास की नई कहानी लिख रही है। भारत ने हाल ही में पवन-ऊर्जा यानि Wind Energy में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब भारत का wind energy generation capacity 56 gigawatt से अधिक हो चुकी है। पिछले एक साल में ही करीब 6 gigawatt नई क्षमता जुड़ी है। (Mann Ki Baat 133rd Episode) Wind energy में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया भी हमारी तरफ देख रही है। साथियो, आज भारत, wind energy capacity में दुनिया में चौथे स्थान पर है। यह हमारे इंजीनियरों की मेहनत है, यह हमारे युवाओं का परिश्रम है, यह देशी की सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है।

साथियो, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान देश के अनेक राज्य इस sector में अपना परचम लहरा रहे हैं। गुजरात के कच्छ, पाटन, बनासकांठा जैसे क्षेत्र जहाँ पहले सिर्फ रेगिस्तान नजर आता था, आज वहाँ, बड़े renewable energy park बन रहे हैं। इसका लाभ युवाओं को मिल रहा है, नए अवसर बन रहे हैं, नई skills विकसित हो रही हैं, रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं।

भारत के विकास के लिए सौर और पवन ऊर्जा जरूरी

साथियो, भारत के विकास के लिए सौर और पवन ऊर्जा जरूरी हैं। ये सिर्फ पर्यावरण की बात नहीं है – ये हमारे भविष्य की सुरक्षा है। इसमें हम सबकी भूमिका है। हमें बिजली बचानी है, हमें स्वच्छ ऊर्जा, clean energy अपनानी है। देश में हर स्तर पर ऐसे प्रयास जरूरी हैं। क्योंकि इन्हीं से बड़ा बदलाव आता है।

Mann Ki Baat 133rd Episode: साथियो, मई महीने की शुरुआत एक पावन अवसर के साथ होने जा रही है। कुछ ही दिनों में हम बुद्ध पूर्णिमा मनाएंगे। मैं आप सभी देशवासियों को अपनी अग्रिम शुभकामनाएं देता हूँ। भगवान गौतम बुद्ध का जीवन संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने हमें सिखाया है कि शांति हमारे भीतर से शुरू होती है, उन्होंने बताया है कि स्वयं पर विजय सबसे बड़ी विजय होती है। आज दुनिया जिस तरह के तनावों और संघर्षों से गुजर रही है। ऐसे समय में बुद्ध के विचार और भी अहम हो गए हैं।

साथियो, दक्षिण अमेरिका के चिली में एक संस्था भगवान बुद्ध के विचारों को आगे बढ़ा रही है। लद्दाख में जन्मे ड्रबपोन ओत्जर रिनपोचे (Drubpon Otzer Rinpoche) के मार्गदर्शन में काम हो रहा है। ये संस्था ध्यान और करुणा को लोगों के जीवन से जोड़ रही है। कोचीगुआज घाटी में बना स्तूप लोगों को शांति का अनुभव कराता है। (Mann Ki Baat 133rd Episode) वाकई, यह देखकर गर्व होता है। भारत की प्राचीन धारा दुनिया तक पहुँच रही है। दूर-दराज के लोग भी इससे जुड़ रहे हैं।

हमें प्रकृति से जुड़ना सिखाती बौद्ध परंपरा

साथियो, बौद्ध परंपरा हमें प्रकृति से जुड़ना भी सिखाती है। भगवान बुद्ध को ज्ञान एक वृक्ष के नीचे मिला था। प्रकृति हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। देश में भी ऐसे प्रयास हो रहे हैं। कर्नाटक में Karma Monastery इसका अच्छा उदाहरण है। यह मठ एक जीवंत वन क्षेत्र है, जो, 100 एकड़ में फैला है। इस वन में 700 से अधिक देसी वृक्षों को संरक्षित किया गया है। साथियो, बुद्ध का संदेश सिर्फ अतीत नहीं है। यह आज भी प्रासंगिक है और भविष्य के लिए भी जरूरी है। बुद्ध पूर्णिमा का यह अवसर प्रेरणा देता है। हम अपने जीवन में शांति बढ़ाएँ, करुणा अपनाएं और संतुलन के साथ आगे बढ़ें।

नेताजी सुभाष की जयंती से लेकर 30 जनवरी मनाया जाता है गणतंत्र का महोत्सव

Mann Ki Baat 133rd Episode: मेरे प्यारे देशवासियो, आप सभी जानते हैं, हमारे देश में अब 23 जनवरी, यानि, नेताजी सुभाष की जयंती से लेकर 30 जनवरी, यानि, गांधी जी की पुण्यतिथि तक गणतंत्र का महोत्सव मनाया जाता है। इसी महोत्सव का अहम हिस्सा होता है – Beating Retreat. आज मैं आपसे Beating Retreat की चर्चा कर रहा हूँ, क्योंकि, इसके पीछे एक खास वजह है।

साथियो, आपने देखा होगा, यह समारोह अलग-अलग bands की विविध संगीत परंपराओं को दर्शाता है। बीते कुछ सालों से इसमें भारतीय संगीत का समावेश बढ़ा है और ये देश के लोगों को भी बहुत पसंद आ रहा है। इस साल की Beating Retreat ceremony भी बहुत यादगार रही थी। Air Force, Army, Navy और C.A.P.F के bands ने बहुत ही अच्छी performance दी थी।

साथियो, शानदार Music के साथ-साथ जानदार formations का ये कार्यक्रम, सबका ध्यान खींचता है। (Mann Ki Baat 133rd Episode) Air Force band ने सिंदूर formation बनाया। NAVAL Band ने मत्स्य यंत्र formation बनाया। वहीं, Army Band के performance में वंदे-मातरम् के 150 साल और cricket में भारत की सफलता को भी दर्शाया गया।

साथियो, Beating Retreat के बीत जाने के बाद, ये सारी मेहनत, ये उपलब्धि धीरे-धीरे ओझल हो जाती थी, लेकिन, अब इसे लेकर बहुत ही अच्छा प्रयास हुआ है। Beating Retreat का music पहली बार WAVES OTT पर भी उपलब्ध है। आने वाले समय में यह दूसरे platforms पर भी मौजूद होगा – आप इसे जरूर सुनें। आपको अपनी Armed Forces और उनकी परंपराओं पर बहुत गर्व होगा।

प्रकृति के संरक्षण की प्रेरक कहानियाँ आई सामने

साथियो, पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रकृति के संरक्षण की प्रेरक कहानियाँ सामने आई हैं। ये कहानियाँ हमें उम्मीद देती हैं और गर्व से भर देती हैं। मैं ‘मन की बात’ के श्रोताओं से कुछ उदाहरण साझा करना चाहता हूँ। इनको सुनकर आपका मन प्रसन्न हो जाएगा। पहले, बात कच्छ के रण की। बरसात खत्म होते ही यहां की धरती जीवंत हो जाती है। हर साल लाखों Flamingo यहां आते हैं। पूरा इलाका गुलाबी रंग से रंग जाता है, इसलिए इसे ‘Flamingo City’ कहा जाता है। ये पक्षी यहीं घोसलें बनाते हैं और अपने बच्चों को बड़ा करते हैं। कच्छ के लोग इन्हें ‘लाखा जी के बाराती’ कहते हैं। अब लाखा जी के ये बाराती कच्छ में पर्यावरण संरक्षण के बड़े सुंदर प्रतीक बन गए हैं।

साथियो, दूसरा किस्सा इंसान और वन्य-जीवों के सहयोग का है। और ये उत्तर प्रदेश से है। (Mann Ki Baat 133rd Episode) यहां के तराई इलाकों में फसल के समय हाथियों के झुंड गाँव की ओर आते हैं। इससे टकराव की आशंका बढ़ती है। लेकिन, अब यू.पी. में भी ‘गज मित्र’ जैसे प्रयास शुरू हुए हैं। गाँव के लोग ही टीम बनाकर हाथियों पर नजर रखते हैं। वे समय रहते लोगों को सतर्क करते हैं। इससे टकराव कम हो रहा है और लोगों में भरोसा बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ फिर से दिखाई देने लगे हैं काले हिरण

Mann Ki Baat 133rd Episode: साथियो, मध्य भारत से भी एक अच्छी खबर आई है। छत्तीसगढ़ में blackbuck, यानि, काले हिरण फिर से दिखाई देने लगे हैं। एक समय इनकी संख्या बहुत कम हो गई थी, लेकिन लगातार प्रयास हुए, और संरक्षण बढ़ाया गया। आज ये फिर से खुले मैदानों में दौड़ते नजर आते हैं। यह हमारी खोती विरासत की वापसी है। ऐसी ही उम्मीद Great Indian bustard यानि गोडावण के संरक्षण में भी दिख रही है। ये पक्षी हमारे रेगिस्तानी इलाकों की पहचान हुआ करती थी। लेकिन, एक समय इसकी संख्या बहुत कम रह गई थी। हालत ये थी कि ये पक्षी लुप्त होने की कगार पर पहुँच गई थी। लेकिन अब इसके संरक्षण के लिए बड़ा अभियान चल रहा है। वैज्ञानिक तरीके अपनाए जा रहे हैं। प्रजनन केंद्र बनाए गए हैं और अब नए जीवन की शुरुआत दिखाई दे रही है

साथियो, प्रकृति और मानव अलग नहीं हैं। हम एक-दूसरे के साथी हैं। जब हम प्रकृति को समझते हैं, उसका सम्मान करते हैं और उसके साथ मिलकर चलते हैं, तो बदलाव साफ दिखाई देता है। आज यही बदलाव देश के कोने-कोने से नई उम्मीद बनकर सामने आ रहा है।

Northeast हम सब के लिए है अष्टलक्ष्मी

मेरे प्यारे देशवासियो, Northeast हम सब के लिए अष्टलक्ष्मी है। यहां भरपूर talent है और Northeast की प्राकृतिक सुंदरता भी सबका ध्यान खींचती है। ‘मन की बात’ में भी हम अक्सर Northeast के लोगों की उपलब्धियों पर चर्चा करते आए हैं। आज ऐसी ही एक और उपलब्धि की मैं आपसे चर्चा करूंगा और वो है – Bamboo sector में Northeast की सफलता। साथियो, जिस चीज को कभी बोझ के रूप में देखा जाता था, वह आज रोजगार, कारोबार और innovation को नई गति दे रही है। हमारी माताएं-बहनें इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी हैं। (Mann Ki Baat 133rd Episode) आपको ये जानकर हैरानी होगी कि bamboo की परिभाषा बदल देने से कितना बड़ा परिवर्तन आया है। साथियो, अंग्रेजों के बनाए कानून के हिसाब से bamboo को पेड़ के रूप में परिभाषित किया गया था और इससे जुड़े नियम बहुत कड़े थे। कहीं पर भी bamboo को ले जाना बहुत मुश्किल था। ऐसे में यहां के लोग बांस से जुड़े काम-धंधे से दूर होते गए। साथियो, साल 2017 में कानून में बदलाव करके हमने bamboo को पेड़ की category से बाहर किया। जिसके नतीजे सबके सामने हैं। आज पूरे Northeast में bamboo sector फल-फूल रहा है। लोग लगातार innovation करके इसमें value addition कर रहे हैं।

साथियो, त्रिपुरा के गोमती district के बिजॉय सूत्रधार और south त्रिपुरा के प्रदीप चक्रवर्ती उन्हीं की बात करें। इन्होंने नए कानूनों को अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा। फिर इन्होंने अपने काम को technology से जोड़ा। आज वे पहले से कहीं बेहतर और कहीं ज्यादा बांस के उत्पाद बना रहे हैं।

नागालैंड के दीमापुर और आसपास के इलाकों में कई ऐसे Self Help Groups हैं जिन्होंने bamboo से जुड़े food products में value addition किया है। वहां खोरोलो क्रिएटिव क्राफ्ट जैसी टीमें भी हैं, जो, बांस के furniture और handicrafts पर काम कर रही हैं ।

बांस के उत्पाद की करें खरीदी

Mann Ki Baat 133rd Episode: साथियो, मिज़ोरम के मामित जिले में ऐसी टीमें हैं, जो, बांस के tissue culture और poly-house management पर काम कर रही हैं। मुझे सिक्किम में गंगटोक के करीब Lagastal Bamboo Enterprise Team के बारे में भी पता चला है। यह bamboo से handicrafts, अगरबत्ती sticks, furniture और interior decor items बनाती है।

साथियो, मैंने यहां पर कुछ ही उदाहरण दिए हैं। देश में bamboo sector की सफलता की यह list काफी लंबी है। मैं आप सभी से आग्रह करूंगा कि Northeast का कोई-न-कोई बांस का उत्पाद जरूर खरीदें। आप इसे gift के रूप में भी दे सकते हैं। आपके इस प्रयास से उन लोगों का हौसला बढ़ेगा, जो bamboo products को बनाने में अपना पसीना बहाते हैं ।

मेरे प्यारे देशवासियो, तेजी से बदलते हुए इस समय में technology हमारी ज़िंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा बन गई है। आज हम अपने अतीत को वर्तमान से जोड़ने में भी technology का कमाल देख रहें हैं। इस दिशा में हाल ही में एक ऐसा development हुआ है जिससे शिक्षा से जुड़े लोग और इतिहास में रुचि रखने वाले बहुत खुश हुए हैं। साथियो, कुछ दिन पहले ही National Archives of India ने एक विशेष portal पर एक अनोखा database शेयर किया है। इस संस्था ने 20 करोड़ से भी ज्यादा अमूल्य दस्तावेजों को digitize कर सार्वजनिक किया है। इनमें से कुछ तो बहुत ही दिलचस्प हैं – 7वीं शताब्दी की गिलगित पांडुलिपियाँ भोजपत्र पर लिखी हुई हैं।(Mann Ki Baat 133rd Episode)  यहाँ आपको 8वीं शताब्दी का एक रोचक ग्रंथ श्री भुवालय भी देखने को मिलेगा। अंकों पर आधारित यह ग्रंथ एक grid के रूप में है। रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े कुछ अहम् पत्र भी आप यहाँ देख सकते हैं। इनसे 1857 में उनके द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों का पता चलता है; जो उनके पराक्रम को दर्शाते हैं। जो लोग नेताजी सुभाष के बड़े प्रशंसक हैं उनके लिए यहाँ नेताजी के जीवन, आजाद हिन्द फौज और उनकी speech से जुड़े कई documents हैं। आपको पंडित मदन मोहन मालवीय जी उनसे जुड़े कई documents भी मिलेंगे। इनमें BHU की स्थापना और हिन्दी साहित्य सम्मेलन से जुड़ी अहम् जानकारियाँ हैं। यहाँ हमारे संविधान सभा से जुड़े कई अनोखे दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि आप www.abhilekh-patal.in को जरूर visit करें। यह आपको अपने इतिहास का अद्भुत अनुभव देगा ।

बेटियों ने बढ़ाया देश का मान

Mann Ki Baat 133rd Episode: साथियो, जरा कल्पना कीजिए, आप दुनिया-भर के सबसे प्रतिभाशाली लोगों के बीच हैं, आपके पास गणित के बहुत ही कठिन सवाल हैं। इन्हें सुलझाने के लिए समय है – केवल साढ़े चार घंटे। यानि वक्त बहुत कम है और competition international है, बहुत तगड़ा है। ऐसी स्थिति में nervous होना बहुत स्वाभाविक है। लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में हमारी बेटियों ने कमाल कर दिया। इस महीने की शुरुआत में फ़्रांस के बोरदो (Bordeaux) में European Girls Mathematical Olympiad का आयोजन हुआ था। Maths में गहरी रुचि रखने वाली स्कूली छात्राओं के लिए ये एक बड़ी प्रतियोगिता थी। यह दुनिया की सबसे सम्मानित प्रतियोगिताओं में से एक है। इस Olympiad में हमारी बेटियों ने अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। मुझे इस प्रतिभाशाली टीम पर बहुत गर्व है। (Mann Ki Baat 133rd Episode) इसमें मुंबई की श्रेया मुंधड़ा, तिरुवनंतपुरम की संजना चाको, चेन्नई की शिवानी भरत कुमार और कोलकाता की श्रिमोयी बेरा शामिल थीं। इसमें हमारी टीम विश्व में छठे स्थान पर रही। श्रेया ने Gold Medal जीतकर इतिहास रच दिया, संजना ने Silver, तो शिवानी ने Bronze Medal अपने नाम किया।

साथियो, इस Olympiad के लिए भारत में जो selection की प्रक्रिया है, वो अपने आप में बहुत कठिन है। इसका एक multi-stage selection process है। इसमें Regional, State और National Level पर कठिन चुनौतियों को पार करना होता है। इसके बाद सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राएँ एक महीने के Mathematics Training Camp में शामिल होती हैं। यह camp, Tata Institute of Fundamental Research के Homi Bhabha Center for Science Education में आयोजित होता है। इस camp के आखिर में team selection test होता है। इसमें performance के आधार पर ही भारत की टीम चुनी जाती है।

साथियो, हर वर्ष देश-भर की करीब 6 लाख students इस Mathematical Olympiad Program में हिस्सा लेती हैं। समय के साथ यह संख्या लगातार बढ़ रही है, यानि, देश की बेटियों के बीच Olympiad का यह culture तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इन होनहार बेटियों को support करने के लिए मैं उनके parents की भी सराहना करता हूँ।

पीएम मोदी ने किया जनगणना का जिक्र

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे देश में इस समय एक बहुत अहम् अभियान चल रहा है, जिसके बारे में हर भारतीय को जानकारी होनी जरूरी है। ये है जनगणना का अभियान, यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना है। साथियो, जो साथी पहले से इस तरह की प्रक्रिया से गुजरे हैं, इस बार जनगणना का उनका अनुभव, अलग होने वाला है। जनगणना 2027 को digital बनाया गया है। सारी जानकारी सीधे digital माध्यम में दर्ज हो रही है। घर-घर जाने वाले कर्मचारियों के पास mobile app है। वे आपसे बात करके उसी में जानकारी दर्ज करेंगे। साथियो, इस बार जनगणना में आपकी भागीदारी भी आसान बनाई गई है, आप खुद भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। कर्मचारी के आने से 15 दिन पहले आपके लिए सुविधा शुरू होगी। आप अपने समय के अनुसार जानकारी भर सकते हैं। (Mann Ki Baat 133rd Episode) जब आप प्रक्रिया पूरी करते हैं, तो आपको एक विशेष ID मिलती है। ये ID आपके mobile या e-mail पर आती है। बाद में जब कर्मचारी आपके घर आता है, तो आप यही ID दिखाकर जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं। इससे दोबारा जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ती। समय भी बचता है और प्रक्रिया आसान हो जाती है। साथियो, जिन राज्यों में स्व-गणना का काम पूरा हो गया है, वहां, गणना कर्मचारी द्वारा घरों के सूचीकरण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। अब तक लगभग 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण का कार्य पूरा भी हो चुका है। साथियो, देश की जनगणना सिर्फ सरकारी काम नहीं है। यह हम सब की जिम्मेदारी है। आपकी भागीदारी बहुत जरूरी है। आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है, यह गोपनीय रखी जाती है, digital सुरक्षा के साथ इसे सुरक्षित किया जाता है। आइए, हम सब मिलकर इस प्रक्रिया में भाग लें। जनगणना 2027 को सफल बनाएं।

Mann Ki Baat 133rd Episode: साथियो, हमारे देश में खाने-पीने की परंपरा सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं रही है। इसी परंपरा का एक दिलचस्प हिस्सा है भारत की Cheese. कुछ दिन पहले मैंने tweet के माध्यम से एक जानकारी साझा की थी। ब्राजील में आयोजित एक अन्तर्राष्ट्रीय Cheese प्रतियोगिता में भारतीय Cheese के दो brands को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं। इस उपलब्धि की चर्चा social media पर भी खूब हुई। कई लोगों ने मुझसे कहा कि भारत में Cheese की जो विविधता है उस पर भी बात होनी चाहिए।

साथियो, भारत के dairy sector में बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। इस sector में Value addition ने हमारे पारंपरिक स्वाद को एक नई पहचान दी है। आज भारतीय cheese दुनिया-भर में अपनी जगह बना रही है। breakfast हो, lunch हो, या dinner, दुनिया की प्लेटों में भारत का स्वाद पहुंच रहा है। जम्मू-कश्मीर की कलारी cheese को ही लीजिए – इसे ‘कश्मीर का मोजेरेला’ कहा जाता है। गुज्जर-बकरवाल समुदाय के लोग, पीढ़ियों से इसे बनाते और खाते आए हैं। वहीं सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में ‘छुरपी’ बहुत प्रसिद्ध है। पहाड़ों की सादगी और कोमलता इसके स्वाद में भी महसूस होती है। इस cheese की खास बात यह है कि इसे याक के दूध से बनाया जाता है।

हमारे देश में स्वाद की दुनिया बहुत व्यापक है

साथियो, महाराष्ट्र और गुजरात में ‘टोपली नु पनीर’ जिसे ‘सुरती cheese’ भी कहा जाता है। वह भी अपनी एक अलग पहचान रखता है। मैंने यहां सिर्फ कुछ नाम लिए हैं लेकिन हमारे देश में स्वाद की यह दुनिया बहुत व्यापक है। आज इस परंपरा को नई ताकत मिल रही है। अनेक भारतीय कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। आधुनिक तकनीक आ रही है, बेहतर packaging हो रही है और हमारे उत्पाद world standard के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इसी का परिणाम है कि भारतीय cheese अब देश की सीमाओं से निकलकर दुनिया के बाजारों और रेस्तरां तक पहुंच रही है। (Mann Ki Baat 133rd Episode) आज हम local से global की बात करते हैं, उसमें भारतीय cheese का उदाहरण, हमें, आगे की दिशा दिखाता है। मुझे विश्वास है भारत का स्वाद, भारत की परंपरा और भारत की गुणवत्ता दुनिया के लोगों को एक नया अनुभव देगी और भारत से एक नया जुड़ाव भी बनाएगी।

Mann Ki Baat 133rd Episode: मेरे प्यारे देशवासियो, इस महीने देश के कई हिस्सों में नववर्ष सहित अनेक पर्व-त्योहार मनाए गए। कुछ ही दिन बाद 9 मई को ‘पोच्चीशे बोइशाख’ के अवसर पर हम गुरुदेव टैगोर की जन्म-जयंती मनाएंगे। गुरुदेव बहु-आयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे एक महान लेखक और विचारक तो थे ही, उन्होंने कई प्रसिद्ध संस्थानों को भी आकार दिया। गुरुदेव टैगोर लोगों के लिए ऐसे उद्योगों के पक्षधर थे, जिनमें स्थायी रोजगार मिलने के साथ ही गांवों का भी कल्याण हो। उनके रवींद्र संगीत का प्रभाव आज भी दुनिया-भर में बना हुआ है। मेरे लिए शांति निकेतन की यात्राएं अविस्मरणीय रहीं। यह वही institution है, जिसे उन्होंने पूरे समर्पण भाव से सींचा और संवारा था। उन्हें एक बार फिर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।

मां भारती की सभी वीर संतानों को नमन

साथियो, मई का महीना 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की याद भी दिलाता है। मैं मां भारती की सभी वीर संतानों को नमन करता हूं, जिन्होंने लोगों में देश-भक्ति की भावना जागृत की थी। यह समय स्कूली बच्चों की छुट्टियों का भी होता है। मेरा आग्रह है कि वे अपनी छुट्टियों का भरपूर आनंद लें और कुछ नया सीखने का प्रयास करें। (Mann Ki Baat 133rd Episode) गर्मियों के इस मौसम में आप सभी अपने स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखें। अगले महीने आपसे फिर मुलाकात होगी। कुछ नए विषयों के साथ, देशवासियों की कुछ नई उपलब्धियों के साथ। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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