नागोया प्रोटोकॉल के तहत अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करने में भारत दुनिया का अग्रणी देश

नागोया प्रोटोकॉल के तहत अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करने में भारत दुनिया का अग्रणी देश

नागोया प्रोटोकॉल के तहत अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करने में भारत दुनिया का अग्रणी देश
Modified Date: March 31, 2026 / 05:07 pm IST
Published Date: March 31, 2026 5:07 pm IST

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) भारत ने पहुंच एवं लाभ साझेदारी संबंधी नागोया प्रोटोकॉल (एबीएस) के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्र (आईआरसीसी) जारी करने में दुनिया में अग्रणी स्थान हासिल किया है। पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि वैश्विक स्तर पर जारी कुल प्रमाणपत्रों में भारत की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत से अधिक है।

पहुंच एवं लाभ साझेदारी (एबीएस) ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि जब कंपनियां या व्यक्ति पौधों और सूक्ष्मजीवों जैसे जैविक संसाधनों का उपयोग करते हैं, तो उससे होने वाले लाभ का उचित हिस्सा उन स्थानीय समुदायों और किसानों को मिले, जो इन संसाधनों का संरक्षण करते हैं।

एबीएस क्लियरिंग-हाउस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने कुल 6,311 वैश्विक प्रमाणपत्रों में से 3,561 प्रमाणपत्र जारी किए हैं, जिससे वह इस प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन में अन्य देशों से काफी आगे है।

पर्यावरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने वाले वैश्विक मंच एबीएस क्लियरिंग-हाउस पर पंजीकृत 142 देशों में से अब तक केवल 34 देशों ने आईआरसीसी जारी किए हैं। भारत के बाद फ्रांस (964 प्रमाणपत्र), स्पेन (320), अर्जेंटीना (257), पनामा (156) और केन्या (144) का स्थान है। ’’

नागोया प्रोटोकॉल के तहत, आनुवंशिक संसाधनों और संबंधित पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच प्रदान करने वाले देशों को आईआरसीसी जारी करना अनिवार्य है। ये प्रमाणपत्र इस बात का आधिकारिक प्रमाण हैं कि पूर्व सूचित सहमति प्राप्त कर ली गई है और संसाधनों के उपयोगकर्ताओं और प्रदाताओं के बीच पारस्परिक रूप से सहमत शर्तें स्थापित हो गई हैं। इसके बाद विवरण एबीएस क्लियरिंग-हाउस में अपलोड कर दिए जाते हैं।

भाषा रवि कांत रवि कांत माधव

माधव


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