समाज केंद्रित रही है भारत की विकास अवधारणा: डॉ. कृष्ण गोपाल

समाज केंद्रित रही है भारत की विकास अवधारणा: डॉ. कृष्ण गोपाल

समाज केंद्रित रही है भारत की विकास अवधारणा: डॉ. कृष्ण गोपाल
Modified Date: January 2, 2026 / 10:14 pm IST
Published Date: January 2, 2026 10:14 pm IST

जयपुर, दो जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने शुक्रवार को कहा कि विकास का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं है बल्कि वास्तविक विकास वही है, जिसमें मनुष्य, समाज, परिवार और प्रकृति का संतुलित उत्थान हो।

उन्होंने कहा कि भारत की विकास अवधारणा आत्मकेंद्रित नहीं, बल्कि समाज केंद्रित रही है और आज के वैश्विक परिदृश्य में यही दृष्टि सबसे अधिक प्रासंगिक है।

वह यहां ‘रज्जु भैया स्मृति व्याख्यानमाला’ में ‘स्व का बोध और विकास की अवधारणा’ विषय पर अपनी राय रख रहे थे।

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उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के लिए “स्व का बोध” अत्यंत आवश्यक है क्योंकि जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि हमारे पूर्वज कौन थे, हमारी संस्कृति, भाषा और साहित्य क्या है तथा जीवन और जगत को देखने की हमारी दृष्टि क्या रही है, तब तक विकास की दिशा सही नहीं हो सकती।

बयान के अनुसार गोपाल ने कहा ,‘‘भारत में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का एक स्थायी उद्देश्य है, जिसे हमारी परंपरा ने निर्धारित किया है। यह उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मिक साधना के साथ पूरे समाज और सृष्टि के हित से जुड़ा हुआ है।’’

उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में भौतिक और आध्यात्मिक दोनों का समन्वित विकास रहा है और यही इसकी हजारों वर्षों पुरानी पहचान है।

उन्होंने वर्तमान विकास मॉडल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गरीबी आज भी देश के लिए एक गंभीर और चिंताजनक समस्या बनी हुई है तथा आर्थिक प्रगति के बावजूद समाज का बड़ा वर्ग सीमित आय और संसाधनों में जीवन यापन कर रहा है।

सह सरकार्यवाह ने कहा कि विकास का लाभ कुछ गिने-चुने शहरों और क्षेत्रों तक सीमित होना गंभीर असंतुलन की ओर संकेत करता है।

बयान के अनुसार कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति में नारी की स्वतंत्रता, कर्तव्य, सृजनशीलता और उसकी आध्यात्मिक चेतना को रेखांकित करने वाली पुस्तक “भारतीय दृष्टि में नारी चिंतन” का विमोचन भी हुआ।

भाषा पृथ्वी राजकुमार

राजकुमार


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