लद्दाख में भारत का पहला ‘पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क’ स्थापित किया जाएगा

लद्दाख में भारत का पहला 'पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क' स्थापित किया जाएगा

लद्दाख में भारत का पहला ‘पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क’ स्थापित किया जाएगा
Modified Date: April 18, 2026 / 08:07 pm IST
Published Date: April 18, 2026 8:07 pm IST

लेह, 18 अप्रैल (भाषा) लद्दाख की प्राचीन विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के तहत उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शनिवार को विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर सिंधु नदी के किनारे भारत के पहले ‘पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क’ की आधारशिला रखी।

‘पेट्रोग्लिफ’ प्रागैतिहासिक चित्र, प्रतीक या नक्काशी हैं, जिन्हें सीधे चट्टानों की सतह पर खुरचकर, ठोककर या उकेरकर बनाया जाता है।

अधिकारियों ने बताया कि इस पार्क का उद्देश्य सदियों पुरानी चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियों के लिए एक समर्पित संरक्षण क्षेत्र के रूप में कार्य करना है। वर्तमान में ये आकृतियाँ अनियंत्रित पर्यटन, बुनियादी ढांचे के तीव्र विकास और जागरूकता के अभाव के कारण गंभीर खतरे का सामना कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि इस विरासत को अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

इस समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त प्रयासों के जरिए इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का कार्य करेंगे।

अधिकारियों ने बताया कि पूरे लद्दाख में लगभग 400 ऐसे स्थल हैं, जहां ‘पेट्रोग्लिफ’ मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ प्राचीन आकृतियों पर चीनी, अरबी, संस्कृत और अन्य पुराकालीन भाषाओं में शिलालेख मौजूद हैं।

उपराज्यपाल ने लद्दाख को ‘प्राचीन विरासत का भंडार’ बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र दक्षिण और मध्य एशिया में ‘प्रागैतिहासिक पाषाण कला (रॉक आर्ट)’ के सबसे व्यापक संग्रहों में से एक है।

भाषा

प्रचेता दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में