भारत की तेल खरीद अन्य देश निर्धारित नहीं करता, कांग्रेस ने अमेरिकी प्रतिबंधों में आयात समायोजन किया

भारत की तेल खरीद अन्य देश निर्धारित नहीं करता, कांग्रेस ने अमेरिकी प्रतिबंधों में आयात समायोजन किया

भारत की तेल खरीद अन्य देश निर्धारित नहीं करता, कांग्रेस ने अमेरिकी प्रतिबंधों में आयात समायोजन किया
Modified Date: March 6, 2026 / 09:18 pm IST
Published Date: March 6, 2026 9:18 pm IST

नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) सरकार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत रूसी तेल खरीदने के लिए कभी भी किसी देश की अनुमति पर निर्भर नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट से तेल शोधक कंपनियों के लिए सुगमता हुई है, जिससे कुछ बाधाएं दूर हुई हैं, लेकिन यह देश की नीति को परिभाषित नहीं करता।

अधिकारी ने कहा कि अमेरिका द्वारा आपत्ति जताए जाने और प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद रूसी तेल भारत में आता रहा। उन्होंने 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत तेल आयात में किए गए समायोजन का हवाला दिया।

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच, अमेरिका ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह भारतीय तेल शोधक कंपनियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट जारी कर रहा है।

वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से प्रत्येक भारतीय परिवार को यह स्पष्ट संदेश है कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और हमेशा की तरह, प्रत्येक नागरिक के हित में कार्य करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 12 वर्षों में किसी भी पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की कमी नहीं हुई है। जिसे कुछ लोग संकट कह रहे हैं, वह वास्तव में हमारी तैयारियों का प्रमाण है। भारत के ऊर्जा प्रबंधन ने हमें वह सुरक्षा प्रदान की है जिसकी हमें आवश्यकता थी।’’

अधिकारी के अनुसार, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में छूट दिए जाने से सुगमता हुई है लेकिन यह भारत की नीति को परिभाषित नहीं करता, जो प्रत्येक भारतीय परिवार के लिए ऊर्जा की तीन नीतियों – सामर्थ्य, उपलब्धता और स्थिरता द्वारा निर्देशित होती है।

भारत के पास वर्तमान में 25 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल और शोधित उत्पादों का भंडार है – जो सात से आठ सप्ताह का ‘बफर’ है – और यह भंडार रणनीतिक भंडारों, भंडारण टैंकों, पाइपलाइन, टर्मिनल सुविधाओं और देश के बंदरगाहों की ओर पहले से ही पारगमन में मौजूद जहाजों में वितरित है।

यह 40 देशों से तेल प्राप्त करता है और तेल शोधक कंपनियां चालू हैं।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चार वर्षों से वृद्धि नहीं हुई है, और यह प्रतिबद्धता अब भी कायम है।

अमेरिकी छूट को लेकर विपक्ष की आलोचना को खारिज करते हुए, अधिकारी ने कहा कि उनके आरोप निराधार हैं और यह ‘‘आश्चर्यजनक नहीं है कि वे चुनिंदा शब्दों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं’’।

वहीं, एक अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘‘भारत जहां भी तेल उपलब्ध होगा, वहीं से खरीदेगा। हमारी तेल खरीद किसी खोखले विमर्श से निर्देशित नहीं होगी। भारत रूसी तेल खरीदने के लिए कभी किसी देश से अनुमति पर निर्भर नहीं रहा है।’’

सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने और आपत्ति जताए जाने के बावजूद रूसी तेल का भारत में प्रवाह जारी रहा। वास्तव में, अमेरिका और यूरोपीय संघ के दबाव के बावजूद भारत ने इस अवधि के दौरान रूसी तेल की खरीद में वृद्धि की।

उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष चाहे भारत का कितना भी मज़ाक उड़ाए, हम कभी किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। हमारी सरकार हमेशा से इस बात पर अडिग रही है कि हम तेल वहीं से खरीदेंगे जहाँ यह उपलब्ध होगा। नागरिकों की ऊर्जा ज़रूरतें हमारी प्राथमिकता हैं, न कि वे शब्द जिनसे आप अपने असफल राजनीतिक विमर्श में जान फूंकने की कोशिश करते हैं।’’

अधिकारी ने कहा कि दरअसल, अमेरिका द्वारा दी गई यह छूट एक बार फिर भारत की रणनीतिक तेल कूटनीति की सफलता को दर्शाती है, जिसके चलते पिछले एक दशक में देश के तेल आपूर्तिकर्ताओं की संख्या 27 से बढ़कर 40 हो गई है।

उन्होंने कहा कि इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि वैश्विक उथल-पुथल या महामारी के दौरान भी भारतीय उपभोक्ताओं को ऊर्जा की कमी नहीं हुई।

अधिकारी के अनुसार, कांग्रेस सरकार ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत तेल आयात में समायोजन किया था। 2013 में, अमेरिकी विदेश विभाग ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि भारत ने ‘राष्ट्रीय रक्षा अधिकृत अधिनियम’ (एनडीएए) की धारा 1245 के तहत प्रतिबंधों से छूट प्राप्त करने के लिए ईरान से कच्चे तेल की खरीद कम कर दी थी।

अधिकारी ने तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी के एक बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘‘मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि चीन, भारत, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, तुर्की और ताइवान ने वित्त वर्ष 2012 के लिए राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (एनडीएए) की धारा 1245 में उल्लिखित प्रतिबंधों से छूट के लिए फिर से अर्हता प्राप्त कर ली है, जो ईरान से कच्चे तेल की खरीद की मात्रा में अतिरिक्त महत्वपूर्ण कमी या उन खरीद को शून्य तक कम करने और वहीं बने रहने पर आधारित है।’’

भाषा

नेत्रपाल माधव

माधव


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