‘सफेदपोश’ आतंकवादी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद कश्मीर में जुटाई जा रही मस्जिदों, मदरसों की जानकारी
‘सफेदपोश’ आतंकवादी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद कश्मीर में जुटाई जा रही मस्जिदों, मदरसों की जानकारी
श्रीनगर, 13 जनवरी (भाषा) पिछले साल ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद कश्मीर में मस्जिदों, मदरसों और धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, मस्जिदों, मदरसों, इमामों, शिक्षकों और इन संस्थानों की प्रबंधन समितियों के सदस्यों का ब्योरा जुटाने के लिए गांव के नंबरदारों (राजस्व विभाग के ग्राम-स्तरीय कर्मचारियों) को एक प्रपत्र दिया गया है।
इस प्रक्रिया में मस्जिदों और मदरसों के वित्तीय मामलों पर खास ध्यान दिया जा रहा है जिसमें निर्माण के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के तरीकों की जानकारी शामिल है।
अधिकारियों ने बताया कि सामान्य जानकारियों के अलावा मदरसा शिक्षकों और इमामों से आधार कार्ड, बैंक खाते, संपत्ति के स्वामित्व, सोशल मीडिया हैंडल, पासपोर्ट, एटीएम कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सिम कार्ड और मोबाइल फोन के मॉडल के साथ उसका आईएमईआई नंबर भी देने को कहा गया है।
नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस अभियान का एक उद्देश्य मस्जिदों, मदरसों और उनसे जुड़े लोगों का एक व्यापक डाटाबेस तैयार करना है।
उन्होंने कहा, “नवंबर में जिस ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था, उसकी जांच में सामने आया कि कुछ संदिग्धों को मदरसों या सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी बनाया गया था। मौलवी इरफान जैसे कुछ इमामों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।”
प्रपत्र में यह जानकारी भी मांगी गई है कि संबंधित मस्जिद या मदरसा किस मुस्लिम पंथ—बरेलवी, देवबंदी, हनफी या अहले हदीस—का पालन करता है।
अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर में व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली सूफी परंपरा को नकारने वाले इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव को भी घाटी के युवाओं में कट्टरता बढ़ने का एक कारण माना जा रहा है।
इमामों, शिक्षकों और प्रबंधन समिति के सदस्यों से यह भी पूछा गया है कि क्या वे पहले कभी आतंकी या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, साथ ही उनसे किसी लंबित मामले या अदालत से हुई सजा का विवरण भी देने को कहा गया है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस की मदद से पिछले साल नवंबर के पहले सप्ताह में एक ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में तीन चिकित्सकों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था और 2,900 किलोग्राम विस्फोटक की बरामदगी हुई थी।
यह मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़ा था और कश्मीर, हरियाणा व उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। भाषा जोहेब नरेश
नरेश

Facebook


