ओडिशा में राज्यसभा की एक सीट के लिए दिलचस्प हुआ मुकाबला, निर्दलीय ने मांगा दूसरे दलों से समर्थन

ओडिशा में राज्यसभा की एक सीट के लिए दिलचस्प हुआ मुकाबला, निर्दलीय ने मांगा दूसरे दलों से समर्थन

ओडिशा में राज्यसभा की एक सीट के लिए दिलचस्प हुआ मुकाबला, निर्दलीय ने मांगा दूसरे दलों से समर्थन
Modified Date: March 4, 2026 / 08:12 pm IST
Published Date: March 4, 2026 8:12 pm IST

भुवनेश्वर, चार मार्च (भाषा) ओडिशा में आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए सत्तारूढ़ भाजपा का समर्थन मिलने के एक दिन बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे ने बुधवार को प्रचार अभियान शुरू किया और कहा कि आवश्यक अतिरिक्त वोटों की व्यवस्था करना उनके लिए “कोई कठिन काम नहीं” है।

रे ओडिशा से एकमात्र ऐसे सांसद रहे हैं जो तीन प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी, एच.डी. देवेगौड़ा और आई के गुजराल के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री रहे।

उन्होंने मंगलवार को घोषणा की थी कि वह भाजपा सदस्य होने के बावजूद 16 मार्च को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे।

राज्य की चार राज्यसभा सीट पर होने वाले चुनाव में भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सांसद सुजीत कुमार को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, जबकि चौथी सीट के लिए रे को समर्थन दिया है।

बीजू जनता दल (बीजद) ने संतृप्त मिश्रा को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट दत्तेश्वर होटा को चौथी सीट के लिए “साझा” उम्मीदवार घोषित किया है।

चूंकि भाजपा और बीजद के पास चौथी सीट अपने-अपने दम पर जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है, इसलिए मुकाबला भाजपा समर्थित रे और बीजद समर्थित होटा के बीच होने की संभावना है।

प्रदेश के 147 सदस्यीय विधानसभा के वर्तमान सदस्यों की संख्या के हिसाब से जीत के लिए किसी उम्मीदवार को 30 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है।

भाजपा के पास 79 विधायक और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन है, जिससे उसकी संख्या 82 हो जाती है। अपने दो आधिकारिक उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के बाद पार्टी के पास 22 वोट अतिरिक्त बचेंगे।

दूसरी ओर जनवरी में दो सदस्यों के निलंबन के बाद बीजद के पास 48 विधायक हैं और एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के बाद उसके पास 18 अतिरिक्त वोट रहेंगे। कांग्रेस के पास 14 विधायक और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पास एक सदस्य है।

रे को जीत के लिए भाजपा के अतिरिक्त वोटों के अलावा कम से कम आठ और वोटों की आवश्यकता होगी।

रे ने कहा, “यह मेरे लिए कठिन काम नहीं है। सभी दलों में मेरे शुभचिंतक हैं। मैंने 2002 में भी ऐसा किया था। तब मैंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर 30 वोटों की व्यवस्था की थी और जीत हासिल की थी। इस बार भी मुझे आवश्यक समर्थन मिलने और चुनाव जीतने का पूरा विश्वास है।”

भाषा जोहेब रंजन

रंजन


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