सनातन धर्म को आज सबसे बड़ा खतरा आंतरिक विभाजन से : मोरारी बापू

सनातन धर्म को आज सबसे बड़ा खतरा आंतरिक विभाजन से : मोरारी बापू

सनातन धर्म को आज सबसे बड़ा खतरा आंतरिक विभाजन से : मोरारी बापू
Modified Date: January 28, 2026 / 06:55 pm IST
Published Date: January 28, 2026 6:55 pm IST

नई दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) प्रख्यात कथावाचक मोरारी बापू ने बुधवार को कहा कि सनातन धर्म को आज सबसे बड़ा खतरा आंतरिक विभाजन से है। उन्होंने उन संप्रदायों पर चिंता व्यक्त की जो मनगढंत देवताओं को स्थापित करने, बढ़ावा देने और पवित्र ग्रंथों में अनधिकृत बदलाव (क्षेपक) कर झूठी कथाएं प्रचारित कर रहे हैं।

मोरारी बापू ने यहां कहा, ‘‘भले ही ऐसे संप्रदायों को अन्य शक्तिशाली ‘गादियों’ का समर्थन मिल जाए, लेकिन ‘व्यास पीठ’ उन्हें कभी मान्यता नहीं देगी। व्यास पीठ अनादि काल से सनातन धर्म के वास्तविक मूल्यों, शास्त्रों और भगवान राम, कृष्ण, शिव एवं मां दुर्गा जैसे आराध्य देवों के प्रति अडिग रही है।’’

मोरारी बापू ने इसके साथ ही कहा कि सनातन धर्म को किसी ऐतिहासिक तिथि या कालखंड की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। उन्होंने कहा कि यह धर्म सभी आध्यात्मिक परंपराओं का सार है।

उन्होंने यह राय नयी दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के समापन पर व्यक्त की। ‘मानस सनातन धर्म’ शीर्षक से आयोजित यह कार्यक्रम 17 जनवरी से 25 जनवरी तक चला।

मोरारी बापू ने वेदों सहित विभिन्न शास्त्रों का संदर्भ देते हुए कहा कि सनातन धर्म ही एकमात्र शाश्वत धर्म है, जिसे किसी ऐतिहासिक तिथि या कालखंड की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। उन्होंने कहा कि यह धर्म सभी आध्यात्मिक परंपराओं के सार को जोड़ता है और इसके केंद्र में सत्य, प्रेम, करुणा और अहिंसा के मूल्य समाहित हैं।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा वेदों से शुरू होकर उपनिषदों, पुराणों और भगवद गीता तक जाती है। उन्होंने रेखांकित किया कि गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ इस निरंतरता का अंतिम प्रामाणिक ग्रंथ है और इसके बाद लिखे गए किसी भी ग्रंथ को सनातन धर्म के मूल ग्रंथों का हिस्सा नहीं माना जा सकता।

मोरारी बापू ने सनातन धर्म के प्रतीकों को परिभाषित करते हुए कहा कि इसका प्रवाह गंगा है, पर्वत कैलाश है, अक्षय वृक्ष वटवृक्ष है, ग्रंथ वेद है, चक्र सुदर्शन है, शीतलता चंद्रमा है और प्रकाश स्वयं भगवान सूर्य हैं।

‘मानस सनातन’ धर्म रामकथा का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया जबकि समापन सत्र को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संबोधित किया। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी शामिल हुईं और यमुना को साफ करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के पहले दिन मोरारी बापू ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

भाषा नरेश धीरज

नरेश


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