भविष्य की अंतरिक्ष उड़ानों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अहम: सुनीता विलियम्स
भविष्य की अंतरिक्ष उड़ानों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अहम: सुनीता विलियम्स
बेंगलुरु, नौ सितंबर (भाषा) जानी-मानी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने बुधवार को कहा कि भविष्य में मानव युक्त अंतरिक्ष मिशन के लिए ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मनुष्य चंद्रमा पर फिर से कदम रखेगा और अंतरिक्ष में उससे भी आगे उड़ान भरेगा, “किसी देश के तौर पर नहीं, बल्कि मानवों के तौर पर।”
सुनीता यहां ‘बेंगलुरु स्पेस एक्सपो’ के नौवें संस्करण में ‘अंतरिक्ष का अगला अध्याय : खोज, विज्ञान और नवाचार पर बातचीत’ विषय पर आयोजित चर्चा के दौरान बोल रही थीं।
उन्होंने कहा कि देश समस्याओं को सुलझाने के एक-दूसरे के तौर-तरीकों से लाभ ले सकते हैं, क्योंकि वे और भी बड़े एवं महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन की तैयारी कर रहे हैं।
मानव युक्त अंतरिक्ष मिशन के मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए सुनीता ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विचार बहुत शानदार है, क्योंकि इससे हमें यह जानने का मौका मिलता है कि दूसरी संस्कृतियों के लोग किस तरह से सोचते हैं और समस्याओं को कैसे हल करते हैं। हमें अलग-अलग मॉड्यूल, स्पेससूट और प्रयोगों की तुलना करने का भी मौका मिलता है।”
उन्होंने कहा, “जब हम चंद्रमा और उससे आगे जाएंगे, तो हम मनुष्यों के तौर पर जाएंगे, न कि किसी एक देश के तौर पर। नयी समस्याओं को हल करने के लिए हमें उन सभी तरह की सोच और विचार प्रक्रियाओं की जरूरत होगी।”
सुनीता ने कहा कि जैसे-जैसे मनुष्य पृथ्वी से और अधिक दूरी पर उड़ान भरेंगे, भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन को अधिक सक्षम एवं मजबूत बनाने की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा, “पृथ्वी पर आप अपना फोन निकालकर किसी भी सवाल का जवाब ढूंढ सकते हैं। आईएसएस (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) पर हमारे पास ऐसा कोई डेटाबेस नहीं है। हम जमीन पर मौजूद टीम से होने वाले संचार पर निर्भर रहते हैं। भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन के लिए, खासकर जब हम पृथ्वी से और अधिक दूर जाएंगे और संचार में और भी अधिक देरी होगी, हमें ऐसा डेटाबेस अंतरिक्ष स्टेशन पर ही उपलब्ध कराना होगा, ताकि समस्याओं को जल्दी हल किया जा सके।”
सुनीता ने भरोसेमंद 3-डी प्रिंटिंग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में अंतरिक्ष में ही प्रयोगों से प्राप्त डेटा और नमूनों का विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करना जरूरी है, ताकि उन्हें पृथ्वी पर भेजने की आवश्यकता न पड़े।
अमेरिकी कंपनी ‘वास्ट स्पेस’ में क्रू साझेदारी मामलों के उपाध्यक्ष टॉम शेली ने बताया कि लगभग पांच साल पहले अस्तित्व में आई उनकी कंपनी ‘हेवन-1’ नाम का अंतरिक्ष स्टेशन बना रही है, जो दुनिया का पहला वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशन होगा।
उन्होंने बताया कि ‘हेवन-1’ को अगले साल लॉन्च किए जाने की योजना है।
शेली ने कहा, “हम जितना हो सके, उतनी जल्दी, सुरक्षित और किफायती दर पर अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण करने की कोशिश कर रहे हैं। आईएसएस के निर्माण में कई देशों ने भारी निवेश किया था। हम दिखाना चाहते हैं कि सरकारों और निजी कंपनियों को जरूरी वैज्ञानिक शोध करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराने का काम ज्यादा तेजी और बेहतर ढंग से किया जा सकता है।”
‘गगनायान’ अभियान के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप ने कहा कि भारत को ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (बीएएस) के लिए अब भी किछ अहम प्रौद्योगिकियों की जरूरत है, जिनमें पुनर्योजी जीवनरक्षक प्रणालियां, काम करने लायक ‘एक्स्ट्रा-वेहिकुलर एक्टिविटी स्पेससूट’ और डॉकिंग क्षमता शामिल है।
प्रताप ने कहा कि बीएएस सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में अनुसंधान और जीवन विज्ञान तथा चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक अध्ययन के लिए एक मंच प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा, “हम ऐसे पड़ाव पर हैं, जहां हम चीजें एक-एक करके नहीं कर सकते। हमें परिवहन यान, अंतरिक्ष स्टेशन और चंद्र मिशन-इन सभी के बारे में एक साथ सोचना होगा। यह एक दूरदर्शी और व्यापक दृष्टिकोण है।”
प्रताप ने कहा कि ‘गगनयान’ अभियान का मकसद स्वदेशी रूप से इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता हासिल करना है।
उन्होंने कहा, “गगनयान सुनने में भले ही किसी एक व्यक्ति को अंतरिक्ष का चक्कर लगाने के लिए भेजने जैसा लगे, लेकिन यह बहुत बड़ी चीजों की नींव रखता है। इसका मुख्य मकसद इंसानी जानकारी के दायरे को बढ़ाना है। प्रौद्योगिकी निजी और सरकारी, दोनों क्षेत्रों के बीच साझा की जाएगी।”
सुनीता ने रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि इंसान, प्रौद्योगिकी और रोबोट को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “रोबोट अभियान में अग्रिम पंक्ति पर हैं-वे उतरने के लिए उपयुक्त जगह की तलाश करते हैं। लेकिन उन्हें केवल उसी जानकारी के आधार पर प्रशिक्षित किया जाता है, जो हमें अभी पता है। फैसले लेने के लिए मौके पर इंसानों की मौजूदगी जरूरी है।”
अंतरिक्ष में 600 से अधिक दिन गुजारने वाली सुनीता ने कहा कि अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के उनके अनुभव ने इस धारणा को और मजबूत किया कि मानवता का एक ही आशियाना है।
सुनीता ने कहा, “मैंने खिड़की से बाहर देखा और सोचा-टीचर सही कहते हैं, यह (पृथ्वी) गोल है। यह चपटी नहीं है।”
उन्होंने कहा, “मेरा सोचना था कि मैं जिन लोगों को जानती हूं, वे सभी, हर पौधा और हर जानवर यहीं मौजूद हैं। यही हमारा आशियाना है और हमें इसकी रक्षा करनी चाहिए। मेरे मन में यह बात कभी नहीं आई कि मैं अमेरिकी हूं या मेरे पिता भारत से हैं और मेरी मां स्लोवेनिया से। हम सभी एक ही ग्रह पर रहते हैं और यह अजीब लगता है कि हमारे बीच मतभेद हैं।”
भाषा पारुल माधव
माधव

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