Iranian Navy Ship India: मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच इस वजह से भारत पहुंचा ईरान का जहाज! इतने नौसैनिक भी मौजूद, क्या जंग में भारत दे रहा ईरान का साथ?
Iranian Navy Ship India: भारत में ईरान के एक युद्धपोत के रुकने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान का युद्धपोत IRIS Lavan तकनीकी खराबी के कारण भारत में रुका हुआ है।
IRAN SHIP INDIA/ image source: ctetsk X HANDLE
- ईरान का एक युद्धपोत भारत में रुके होने का दावा
- युद्धपोत में ईरान के 183 नौसैनिक मौजूद
- तकनीकी खराबी के बाद भारत से मदद मांगी
Iranian Navy Ship India: नई दिल्ली: भारत में ईरान के एक युद्धपोत के रुकने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान का युद्धपोत IRIS Lavan तकनीकी खराबी के कारण भारत में रुका हुआ है। दावा किया जा रहा है कि इस जहाज में ईरान के करीब 183 नौसैनिक मौजूद हैं। जानकारी के मुताबिक जहाज में तकनीकी समस्या आने के बाद ईरान ने भारत से मदद मांगी थी। इसके बाद यह युद्धपोत 4 मार्च को Cochin Port यानी कोच्चि बंदरगाह पहुंचा। इस खबर के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है।
Iranian Navy Ship: 183 क्रू मेंबर भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हैं
बताया जा रहा है कि जहाज पर मौजूद सभी 183 क्रू मेंबर फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं। भारतीय नौसेना की ओर से उन्हें जरूरी तकनीकी सहायता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार यह एक नियमित नौसैनिक सहयोग का हिस्सा है, जिसमें मित्र देशों के जहाजों को तकनीकी सहायता दी जाती है। हालांकि इस मामले को लेकर आधिकारिक स्तर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र में लंबे समय तक ऑपरेशन के दौरान युद्धपोतों में तकनीकी खराबी आना असामान्य नहीं है, इसलिए ऐसे मामलों में दूसरे देशों के बंदरगाहों की मदद ली जाती है।
Iran warship technical fault India: मिलान 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था
जानकारी के अनुसार IRIS लावन हाल ही में भारत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम International Fleet Review में भी शामिल हुआ था। इसके अलावा यह जहाज Milan 2026 नामक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भी हिस्सा ले चुका है। यह अभ्यास भारत की मेजबानी में आयोजित होता है और इसमें कई देशों की नौसेनाएं शामिल होती हैं। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, सहयोग और आपसी तालमेल को मजबूत करना होता है। फिलहाल माना जा रहा है कि जहाज की तकनीकी समस्या दूर होने के बाद यह दोबारा अपने मिशन पर रवाना हो सकता है। हालांकि क्षेत्र में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण इस घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
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