अगले एलवीएम-3 मिशन के लिए इसरो ने क्रायोजेनिक इंजन का अंतिम उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया

अगले एलवीएम-3 मिशन के लिए इसरो ने क्रायोजेनिक इंजन का अंतिम उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया

अगले एलवीएम-3 मिशन के लिए इसरो ने क्रायोजेनिक इंजन का अंतिम उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया
Modified Date: July 7, 2026 / 10:10 pm IST
Published Date: July 7, 2026 10:10 pm IST

नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 के सातवें परिचालन मिशन के लिए निर्धारित सीई-20 क्रायोजेनिक इंजन का अंतिम उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

इस परीक्षण में रॉकेट में लगाने से पहले इंजन को वास्तविक परिस्थितियों की तरह चलाकर यह परखा जाता है कि वह सही ढंग से काम कर रहा है या नहीं।

इसरो ने मंगलवार को जारी एक बयान में बताया कि यह परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में किया गया।

पहले जीएसएलवी एमके-3 के नाम से पहचाने जाने वाला एमवीएम-3 इसरो का सबसे भारी और सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। इसके ऊपरी चरण को शक्ति देने के लिए सीई-20 क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग किया जाता है।

इसरो ने कहा, ‘‘इंजन 19 टन से 22 टन तक के थ्रस्ट (रॉकेट या इंजन को आगे की ओर धकेलने की क्षमता) पर काम करने के लिए प्रमाणित है। यह इंजन अब तक एलवीएम-3 के लगातार आठ सफल मिशनों में शानदार प्रदर्शन कर चुका है। इनमें चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और तीन वाणिज्यिक मिशन भी शामिल हैं।’’

इसरो ने कहा, ‘‘गगनयान मिशन में इस्तेमाल के लिए इस इंजन ने मानव मिशनों के लिए आवश्यक सुरक्षा और विश्वसनीयता संबंधी सभी मानकों को भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।’’

हाल ही में किए गए अंतिम उड़ान परीक्षण के दौरान सीई-20 इंजन का 22 टन थ्रस्ट पर परीक्षण किया गया। इस परीक्षण में पहली बार ‘नोजल सुरक्षा प्रणाली’ (एनपीएस) का उपयोग किया गया।

एनपीएस एक ऐसी तकनीक है, जो इंजन के नोजल (रॉकेट इंजन का नोजल वह हिस्सा होता है, जिससे अत्यधिक गर्म और तेज गति वाली गैसें बाहर निकलती हैं) को परीक्षण के दौरान सुरक्षित रखती है और विशेष रूप से उच्च ऊंचाई जैसी परिस्थितियों में इंजन का परीक्षण आसान बनाती है।

इसरो के अनुसार, यह प्रणाली उच्च ऊंचाई जैसी परिस्थितियों में किए जाने वाले जटिल परीक्षणों को काफी आसान बनाता है। इसकी मदद से कम संसाधनों में परीक्षण किया जा सकता है और परीक्षण की अवधि भी बढ़ाई जा सकती है।

इसरो ने कहा, ‘‘परीक्षण के परिणामों से इंजन की सभी प्रणालियां और एनपीएस का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया है।’’

भाषा गोला माधव

माधव


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